• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 07 May, 2019 07:02 AM | Total Read Count 544
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मोदी हैं तो दिवालिया होंगे ही!

डॉ. मनमोहनसिंह ने अचानक झिंझोड़ा। ध्यान कराया कि आर्थिकी पर सोचें। उन्होंने चेताया है कि भारत महामंदी की कगार पर है। लेकिन यह सुन कर कौन चिंता करने वाला है? हिसाब से चुनाव में नंबर एक मुद्दा आर्थिकी का होना चाहिए था। इसलिए कि पिछले पांच सालों का लब्बोलुआब आर्थिक बरबादी है। बजट घर का, दुकान का, कारोबार का, देश का मतलब सभी का पटरी से उतरा हुआ है। बावजूद इसके लोग ऐसी मूर्खता, अज्ञानता के घोल वाले चुनाव में हैं, जोसवा सौ करोड़ लोगों को सुध नहीं है कि भाषणों से दो रोटी नहीं बेली जा सकती। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भाषणों की सुनामी ला रखी है। पिछले पांच सालों में बोल-बोल कर सभी के कान पका दिए हैं लेकिन कोई मोदी सरकार से पूछने वाला नहीं कि आर्थिकी इतनी बरबाद कैसे हुई? सरकार में रत्ती भर खेद, प्रायश्चित का भाव नहीं है कि हां, कुछ गलती हुई। पांच सालों में लोगों को तकलीफ हुई तो उसके लिए माफ करें। लोग क्योंकि मूर्ख बने हुए हैं, मुंगेरीलाल बने हुए हैं, झूठे खौफ में डरे हुए हैं तो यह सवाल उठा नहीं मिलेगा कि रोजगार क्यों नहीं है? काम धंधों में रौनक क्यों नहीं है? जब जनता खुद बेसुध है तो नरेंद्र मोदी, अमित शाह या भाजपा क्यों आर्थिक मसलों पर बोलें!

कितनी गजब बात जो चुनाव है लेकिनजीवन जीने की आर्थिक बहस गायब है। मतदाता अपने आपसेभी यह पूछने की सुध में नहीं है कि गुजरे पांच सालों में हमारा जीना कैसा रहा? लोगों को तंगी, खाली जेब, जीवन भर की कमाई, घरों की बचत पर सरकार की जबरदस्ती, कंपनियों, काम धंधों को बरबादी झेलनी पड़ी लेकिन इस पर मोदी सहित किसी भाजपा नेता ने एक भी बार खेद जताने वाला जुमला नहीं बोला। 

बहरहाल, आर्थिकी पर फोकस बनाने का इकलौता चुनावी इंटरव्यू डॉ. मनमोहनसिंह का आया है। उन्होंने रविवार को एनडीए सरकार के पांच साला राज को शासन और जवाबदेही में असफलता की दुखद दास्तां का नाम दिया। एक भले नेता, भले पूर्व प्रधानमंत्री ने शालीन शब्दों से आलोचना की। डॉ. मनमोहनसिंह ने ठीक कहा कि नरेंद्र मोदी का राज भारत के व्यापारियों, किसानों और नौजवानों और भारत की हर लोकतांत्रिक संस्था के लिए भयावह गुजरा है। भाजपा हर दिन नई बात, नया विमर्श, नया नैरेटिव बनाती है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के विजन में उसके दिवालियेपन का प्रमाण है।

मनमोहनसिंह ने यह भी कहा कि यूपीए सरकार जांचपड़ताल के लिए खुली याकि ओपन थी जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानते हैं कि यदि भ्रष्टाचार का आरोप है तब भी जांच नहीं होनी चाहिए और न वे जवाबदेह हैं। पाकिस्तान के प्रति मोदी फ्लिप-फ्लॉप कभी सर्द-कभी गर्म का वह रवैया लिए हुए रहे हैं, जिसमें बिना न्योते पाकिस्तान गए तो पठानकोट छावनी में आईएसआई के लोगों को आने दिया।

एक पूर्व प्रधानमंत्री का ऐसे सोचना हिसाब से हर नागरिक, सभी पार्टियों के नेताओं की सोच काभी खांका होना चाहिए। पिछले पांच सालों का जो अनुभव है और आर्थिकी के मौजूदा आंकड़ों में भारत की आगे जो दशा होनी है उस पर सभी को बहस करनी चाहिए। लेकिन मनमोहनसिंह ने ठीक कहा कि नरेंद्र मोदी और उनका प्रचार किसी एक बात, एक नैरेटिव पर लोगों को टिका नहीं रहने दे रहा है। 

सही में नरेंद्र मोदी और अमित शाह व उनके रणनीतिकारों ने तय किया है कि हर दिन ऐसी गाली, ऐसा जुमला बोलो, जिस पर विपक्ष उलझे और लोग रोजमर्रा की हकीकत पर सोचे ही नहीं। जैसे कांग्रेस उनकी हत्या चाहती है या राजीव गांधी करप्ट नंबर वन या ममता बनर्जी के चालीस विधायक मेरी जेब जैसे जुमलों को फेंक कर नरेंद्र मोदी ने सुनिश्चित किया है कि विपक्ष ऐसे बोलों के जवाब में उलझा रहे और भाजपा का प्रचार नित नया हल्ला बनाता जाए। 

सो, पेट पर लात और उसके बावजूद पेट की भूख व काम धंधे व रोजगार आदि पर भारत के चुनाव में बहस नहीं होना इस हकीकत का प्रमाण है कि सवा सौ करोड़ लोग कैसी अज्ञानता में जी रहे हैं। कोई माने या न माने अपना मानना है कि यदि नरेंद्र मोदी वापिस प्रधानमंत्री बने और अरूण जेटली उनके फिर से वित्त मंत्री हुए तो भारत की आर्थिकी अगले दो-तीन सालों में वेनेजुएला, जिंबाब्वे की दशा में होगी। तंगी, मंदी और कामकाज के ठप्प होने का ऐसा भयावह मंजर बनेगा, जिसके दबावों में नरेंद्र मोदी नोटबंदी जैसी गलतियां करते जाएंगे। अपनी इस थीसिस में मनमोहनसिंह के इंटरव्यू का यह वाक्य गौरतलब है कि भारत आर्थिक मंदी की और बढ़ रहा है और मोदी सरकार आर्थिक विजन की कमी से कबाड़ अर्थव्यवस्था छोड़ जा रही है। उन्होंने हालिया आर्थिक आंकड़ों के हवाले कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ‘अत्यधिक नियंत्रणों’ में जकड़ी हुई है और सरकार के नियंत्रण व हस्तक्षेप इतने ज्यादा हो गए हैं कि रेगुलेटर अब कंट्रोलर माफिक हैं। आर्थिक नीतियों में अदालती हस्तक्षेप बढ़ रहा है।   

पूर्व प्रधानमंत्री ने बेबाकी से बताया कि मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि हमारी आर्थिकी भारी संकट में है। निजी उपभोग में गिरावट, धीमी निवेश बढ़ोतरी और निर्यात में सुस्ती वे कारण हैं, जो देश को मंदी की ओर ले जा रहे हैं। नोटबंदी संभवतया आजाद भारत का सर्वाधिक बड़ा घोटाला है, जिसने आर्थिकी के अनौपचारिक- असंगठित क्षेत्र को ऐसा मारा कि करोड़ों लोग बेरोजगार हुए। यह उन लोगों के साथ आपराधिक धोखा था, जिन्होंने भारी बहुमत से इस सरकार को चुना। सरकार को संसद के भारी बहुमत मिला हुआ था उसकी राजनीतिक पूंजी से आर्थिकी के कायाकल्प का मौका था लेकिन वह पूंजी जाया हुई। उलटे आर्थिकी में बाधाएं डालने वाले, नोटबंदी जैसे फैसले हुए। सरकार निवेश बढ़ने की बात करती है लेकिन एफडीआई वृद्धिपांच वर्ष में न्यूनतम है। कोर सेक्टर का विकास पिछले दो साल से निम्न है और रुपया एशिया की सर्वाधिक खराब प्रर्दशन वाली करेंसी है।  

कुल मिला कर मनमोहनसिंह ने बताया है कि कोई जीते, चुनाव नतीजों के बाद भारत की आर्थिकी बिगड़ेगी। सरकार मोदी की बने या किसी और की, सवा सौ करोड़ लोगों की बदहाली बढ़ेगी। 

वोट जरूर डालें, छोड़ें ईवीएम चिंता

हां, किसी को यदि ईवीएम मशीन पर शक भी है तब भी वोट डाले। मुझसे लखनऊ में एक मतदाता ने कहा कि वोट देने का फायदा क्या है। मोदी हारेंगे नहीं। उसनेमुझसे पूछा क्या आप नहीं मानते कि मोदी ने ईवीएम को मोदी मैनेज करा रखा है। वह मतदाता लखनऊ में मेरा टैक्सी ड्राईवर था। सफर के पहले दिन वह हम लोगों की बात सुनता रहा। टैक्सी में मेरे साथ जो आता-जाता तो चुनावी माहौल की बातों को चुपचाप सुनता रहा। पत्रकार अमिताभ से बातचीत में जब मेरे मुंह से निकला कि यूपी में तो एलायंस जीतता लग रहा है तो वह ड्राईवर अचानक बोला- मगर सब तो कह रहे हैं मोदी जीतेगा। हमारे यहां ऐसी बात नहीं है लेकिन शहर में सब मोदी, मोदी कर रहे हैं। तब मैंने उससे पूछा तुम कहां के रहने वाले हो और किस जाति से हो तो उसने बताया – मैं रायबरेली से और यादव हूं। फिर वह बताने लगा कि सपा-बसपा के यादव, दलित सब रायबरेली में सोनिया गांधी को वोट देने की ठाने हुए हैं।हमारी बस्ती में भाजपा का कुछ नहीं है लेकिन हम सब सोचते हैं कि ईवीएम से भाजपा जीतेगी तो क्या फायदा वोट डालने का।

उफ! उसका कहा मेरे लिए सदमा था। ईवीएम को ले कर इतना अविश्वास!मैंने समझाया, हिम्मत दिलाई कि इतने बड़े देश, इतने करोड़ वोटों में ईवीएम से धांधली संभव नहीं है। वोट जरूर डालो और इसी ईवीएम मशीन से सपा-बसपा एलायंसजीतता मिलेगा। पर वोट जरूर डालना।

सो, किसी भी तरह के मोदी-भाजपा विरोधी या मोदी समर्थक, सभी को कतई नहीं सोचना चाहिए कि मोदी हारेंगे नहीं तो उनके खिलाफ वोट डालना फिजूल या मोदी वैसे ही जीत रहे हैं तो उनके लिए वोट डालने की क्या जरूरत?

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