• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 16 May, 2019 08:26 AM | Total Read Count 472
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तीसरे मोर्चे की पार्टियों को कितनी सीटें?

कांग्रेस और भाजपा दोनों के मोर्चे से अलग जो पार्टियां इस बार चुनाव लड़ रही हैं उनको कितनी सीटें मिलेंगी? इस सवाल का हर पार्टी और हर गठबंधन के पास अपना अपना जवाब है। हर प्रादेशिक क्षत्रप अपने को जीतता हुआ मान रहा है और उसी हिसाब से चुनाव बाद की रणनीति बना रहा है। पर इतना तय है कि देश के पांच राज्यों की 185 लोकसभा सीटों में से ज्यादातर सीटें प्रादेशिक क्षत्रपों को जाने वाली हैं और अगर त्रिशंकु लोकसभा बनती है तो सरकार बनाने में इनकी बड़ी भूमिका होगी। 

वैसे देश की ज्यादातर छोटी और कई बड़ी पार्टियों ने कांग्रेस या भाजपा से तालमेल कर लिया है। बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक, झारखंड, जैसे राज्यों में कांग्रेस और भाजपा के गठबंधनों के बीच मुकाबला है तो बाकी राज्यों में कांग्रेस और भाजपा की आमने सामने की लड़ाई है। पर पांच राज्य ऐसे हैं, जिनका किला क्षत्रपों ने संभाला है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओड़िशा में प्रादेशिक पार्टियां बहुत मजबूत हैं और इन पांच राज्यों की ज्यादातर सीटें इनके खाते में जाएंगी। 

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तो कांग्रेस और भाजपा के हाथ कुछ नहीं लगना है। इन दो राज्यों की 42 लोकसभा सीटों में से एकाध सीटों को छोड़ कर लगभग सारी सीटें वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी और टीआरएस को जानी है। तभी इन दोनों प्रदेशों के क्षत्रप नेता – चंद्रबाबू नायडू और के चंद्रशेखर राव दिल्ली की राजनीति में अपनी भूमिका बनाने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ज्यादा भागदौड़ नहीं कर रहे हैं पर यह तय है कि राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से ज्यादातर उनकी पार्टी बीजू जनता दल को मिलेंगी। 

अगली सरकार के लिहाज से सबसे ज्यादा निर्णायक उत्तर प्रदेश होगा, जहां सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन भाजपा को सीधी टक्कर दे रहा है। राज्य की 80 में से 50 से ज्यादा सीटें इस गठबंधन को मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसी तरह पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में भी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी को ज्यादातर सीटें मिलेंगी। भाजपा तमाम प्रयास के बाद वोट प्रतिशत बढ़ाएगी पर सीटों के मामले में कुछ चमत्कार की उम्मीद कम है। सो, इन पांच राज्यों की 185 में से डेढ़ सौ से ज्यादा सीटें पांच क्षत्रपों के पास रहनी है। और तभी चुनाव के बाद सरकार बनाने में इनकी बड़ी भूमिका रहने वाली है। 

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