फिजूल का हल्ला है संघीय मोर्चे का


[EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 15 May, 2019 08:22 AM | Total Read Count 197
फिजूल का हल्ला है संघीय मोर्चे का

भारत में तीसरा मोर्चा तो कई बार राजनीतिक रूप से सफल रहा है पर चौथा मोर्चा कभी सफल नहीं हो पाया है। खास कर अगर उसका नाम संघीय मोर्चा रख कर प्रयास किया गया हो तब। पहले ममता बनर्जी इसका प्रयास कर चुकी हैं और अब के चंद्रशेखर राव इस प्रयास में लगे हैं कि वे कोई चौथा या संघीय मोर्चा खड़ा करें। पर वे जहां भी गए हैं उनको निराशा हाथ लगी है।  पार्टियों ने उनको टका सा जवाब दे दिया है। पहले दौर में वे दक्षिण भारत में घूम रहे हैं और वहीं पर उनका प्रयास फेल हो रहा है। 

जानकार सूत्रों के मुताबिक सबसे पहले सीपीएम ने ही उनके इरादे पर पानी फेर दिया। चुनाव के बाद जब वे मोर्चा बनाने निकले तो सबसे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन से मिलने गए थे। बताया जा रहा है कि विजयन ने उनसे दो बातें कही हैं। पहली बात तो यह कही है कि उन्हें नतीजों तक इंतजार करना चाहिए। जब तक नंबर सामने नहीं आते हैं तब कोई प्रयास कारगर नहीं होगा। दूसरी बात उन्होंने यह कही कि भाजपा के विरोध में कोई भी मोर्चा कांग्रेस के बगैर नहीं बन सकता है। बताया जा रहा है कि इस साल मार्च में जब के चंद्रशेखर राव कोलकाता गए थे ममता बनर्जी से मिलने तब ममता ने भी उनसे यहीं बात कही थी। 

इसके बावजूद उन्होंन हिम्मत नहीं हारी और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन से मिलने चेन्नई पहुंच गए। बताया जा रहा है कि स्टालिन ने उनको टका सा जवाब दिया। कहा कि उनका तालमेल कांग्रेस के साथ है, वे यूपीए का हिस्सा हैं और यूपीए में ही रहेंगे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का स्टैंड भी यहीं है। यह तय है कि स्टालिन और कुमारस्वामी किसी हाल में कांग्रेस के खिलाफ नहीं जा रहे हैं। इसी तरह यह भी तय है कि वामपंथी पार्टियां भी कांग्रेस के साथ ही रहेंगी। हालांकि उनकी हैसियत इस बार किसी चीज को प्रभावित करने की नहीं रहेगी। बहरहाल, जब चंद्रशेखर राव दक्षिण भारत के क्षत्रपों और वामपंथी नेताओं के साथ तार नहीं जोड़ पा रहे हैं तो उत्तर और पूर्वी भारत के प्रादेशिक नेताओं से तो उनकी बात नहीं ही बनने वाली है। 

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