• [EDITED BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 14 May, 2019 08:39 AM | Total Read Count 161
  • Tweet
देवेश्वर थे श्रेष्ठतम प्रबंधक

भगवान गंजे को नाखून नहीं देता है। उसने मुझे किसी धनवान, व्यापारिक व औद्योगिक परिवार में पैदा नहीं किया। हालांकि मुझे इस बात का दुख नहीं है। दुख इस बात का है कि अगर मैं ऐसे किसी परिवार में पैदा हुआ होता तो ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से अपनी कंपनी बनाता और उसमें अंग्रेजो को काम पर रखता। 

इसकी वजह मेरी हीन भावना नहीं, मेरा बचपन कानपुर में बीता जहां आजादी के पूर्व अंग्रेजों की काफी अहमियत थी। मेस्टन रोड सरीखे सड़को के नाम से लेकर मैटकर (मैजेकर गंगा पार) ब्रिटिश इंडिया कारपारेशन (लाल इमली) व एलिगन मिल सरीखे नाम हममें हीनता का बोध बनाते हुए मानो कहते थे कि एक समय था जब अंग्रेज ही सब कुछ थे। हम व हिंदुस्तानी तो नाकारा थे। 

हाल में जब आईटीसी के कर्ताधर्ता योगेश चंद्र देवेश्वर के निधन की खबर पढ़ी तो यह सब याद आ गया। इसकी वाजिब वजह तो यह थी जब एक बार मैं साईकिल से कहीं जा रहा था तो मैंने रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक भव्य बंगले पर लगा इंपीरियल टुबैको कंपनी का बोर्ड उतार कर वहां इंडिया टुबैको कंपनी का बोर्ड लगाते हुए लोगों को देखा तब मुझे बेहद खुशी हुई। हालांकि मेरा उस सबसे कुछ लेना-देना नहीं था। आईटीसी भारत की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी थी व देश में बनने वाली 81 फीसदी सिगरेट वहीं बनाती थी। इसके अलावा वह कैप्स्टेन, नेवीकट व विल्स नाम के जाने-माने उत्पाद भी बनाती थी। 

यह कंपनी 1910 में कलकत्ता में एक अंग्रेज द्वारा स्थापित की गई थी जो कि तंबाकू के पत्तो व तंबाकू का कारोबार करता था। उसने 1913 में कलकत्ता में 3.10 लाख में जमीन खरीद कर वर्जीनिया हाऊस बनाकर सिगरेट का उत्पादन शुरू किया। वह अंग्रेज था व जल्दी ही यह कंपनी सिगरेट समेत तमाम सामान की पैकिंग के उत्पाद भी बनाने लगी। आजादी के बाद इसका प्रबंधन भारतीय हाथों में आया और उसने सिगरेट उत्पादन का काम कम करने के साथ-साथ कंपनी में अपनी हिस्सेदारी भी बढ़ानी शुरू कर दी। 

योगेश चंद देवेश्वर ने 1968 में यह कंपनी ज्वाइन की। उनका जन्म 1946 में लाहौर में हुआ था व उन्होंने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद हॉवर्ड बिजनेस स्कूल से प्रबंधन की पढ़ाई की थी। उनकी क्षमता व योग्यता को देखते हुए कंपनी के तत्कालीन प्रमुख अजीत नारायण ने उन्हें प्रबंधन में लिया ओर उन्होंने सिगरेट उत्पादन की जगह दूसरे उत्पाद तैयार कर ,बेचने पर ज्यादा जोर देना शुरू कर दिया। उन्होंने जिदंगी में रोजाना उपयोग में आने वाले उत्पाद जैसे साबून, शैंपू से लेकर आटा तक बनवाया। यह कंपनी विवेल साबुन, आशीर्वाद आटा से लेकर साबुन व अगरबत्ती तक बनाती है। 

उन्होंने इसकी शुरुआत सोयाबीन, गेंहू, तेल, कॉफी के उत्पादन से की थी। पिछले साल कंपनी का मुनाफा 5200 करोड़ रुपए पहुंच गया। प्रत्यक्ष रूप से कंपनी 26 लाख अप्रत्यक्ष रूप से 1 करोड लोगों को रोजगार देती है। सबसे अहम बात तो यह है कि यह बहुराष्ट्रीय कंपनी जैसे हिंदुस्तान लीवर सरीखी कंपनी से प्रतिस्पर्धा कर रही है। देवेश्वर ने पूरे देश के 60,000 गांवों में ई चौपाल की स्थापना की ताकि गांवों के किसान से कंपनी अपने उत्पाद सीधे खरीद सके। इससे किसानों व कंपनी दोनों का फायदा हो जाता था। जहां किसानों को दलाली का शिकार नहीं होना पड़ता व उन्हें अपने उत्पाद का सही दाम मिल जाता वहीं आईटीसी सस्ते दामों पर सामान खरीद सकती थी व मनचाही फसल व कच्चा माल तैयार करवा सकती थी। 

उनकी योग्यता या सफलता को देखते हुए फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें दुनिया के श्रेष्ठतम प्रबंधकों में एक घोषित किया। एपल कंपनी के स्टीव जाब्स के बाद उनका नंबर आता था। वे अपनी कंपनी में सबसे ज्यादा वेतन लेने वाले प्रबंधक थे। उन्हें हर माह 26 लाख रुपए वेतन के रूप में मिलते थे जोकि अन्य किसी को दिए जाने वाले अधिकतम वेतन की दोगुना रकम थी। देवेश्वर इस कंपनी के 15 साल तक प्रमुख रहे जोकि अपने आप मे एक रिकार्ड था। 

उन्होंने वैलकम ग्रुप नाम से आईटीसी के 90 होटल बनवाए। वे कुछ वर्षों तक एयर इंडिया, एयरपोर्ट अथारटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहे। उस दौरान यह कंपनी मुनाफे में चल रही थी। उन्हें 2011 में सरकार ने पद्मभूषण दिया। उन्हें उनके करीबी वाईसीडी या योगी देवेश्वर के नाम से पुकारते थे। जैसा कि सब जानते हैं कि धूम्रपान सेहत के लिए खतरनाक होता है। वे पूरी दुनिया में सिगरेट बेचते थे। वह खुद इसे पीते थे या नहीं यह तो नहीं पता पर आमतौर पर कैंसर का इसे जनक माना जाता है। वे पिछले पांच वर्षों से कैंसर से पीडि़त थे व महज 73 साल की आयु में इस दुनिया से चले गए।

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories