• [EDITED BY : Vivek Saxena] PUBLISH DATE: ; 03 May, 2019 07:15 AM | Total Read Count 139
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अजहर पर फैसले से क्या होगा?

इस कॉलम में पापाजी के बारे में लिख रहा हूं। पापाजी मेरे सबसे अभिन्न मित्र छोटे के पिताजी थे और उनकी वाकपटुता और कही जाने वाली बाते प्रत्युत्तर गजब की हुआ करती थी। जब मैंने मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने की खबर पढ़ी तो स्वर्गीय पापाजी (रामचंद्र वाजपेयी) जी की याद आ गई और सोचने लगा कि अगर हम किसी ने पापाजी को यह खबर दी होती तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती। इस पर मुझे बचपन की एक घटना याद आ गई जब हम लोग कानपुर के किदवई नगर में रहते थे। 

एक बार हमारा कोई साथी भागता हुआ छोटे के घर आया व पापाजी से कहने लगा कि चौराहे पर बदमाशों ने किसी व्यक्ति को गोली मार दी है तो सब भौचके रह गए मगर पापाजी ने प्रत्युत्तर में उससे पूछा तो क्या उसको गोली मारने से चीजे सस्ती हो गई। उसके समेत हम सब उनका मुंह देखने लगे। फिर समझ में आया कि शायद पापाजी हमें यह समझाना चाहते होंगे कि इस घटना से हमें क्या मतलब क्योंकि उससे हमारी जिदंगी या काम पर तो कोई असर पड़ नहीं रहा है। यही मुझे मसूद अजहर की खबर सुनकर लगा।

मसूद अजहर दुनिया का ऐसा बहुत बड़ा आतंकवादी है जिसे पाकिस्तान ने शरण दे रखी है। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने उसे कल आतंकवादी घोषित किया। इसे राजनियक तौर पर भारत की बहुत बड़ी जीत मानी जा रही है क्योंकि पिछले 10 सालों में जब भी भारत उसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के लिए प्रस्ताव लाने में सफल हुआ। सुरक्षा परिषद के सदस्य चीन ने हर बार उसे कोई न कोई अड़ंगा लगा दिया। पुलवामा में हुए हमले के बाद भारत ने एक बार फिर उसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने की दिशा में पहल की थी तब सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी करके इस हमले की कड़ी निंदा की थी। 

इसे देख कर लगने लगा कि इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद को एकजुट करने के आसार बनने लगे हैं। उसके छह दिन बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तीन सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस ने अजहर को आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाने की फिर पुनरावृत्ति की। इस बार अफ्रीका से यूरोप तक व अमेरिका से आस्ट्रेलिया व जापान से कनाड़ा तक के संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने इस पहल का समर्थन किया। 

जब चीन ने तकनीकी रूप से इसे छह माह तक टालने का प्रयास किया तो इसमें अमेरिका काम आया और उसने छह माह तक प्रस्ताव का इंतजार करने के बजाए उसे जल्दी स्वीकारने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस बार अमेरिका ने सदस्य देशों से कहा कि वह इस आशय का प्रस्ताव पेश कर रहा है और उस पर उन्हें उनका समर्थन चाहिए। चूंकि चीन चार बार पहले इस प्रस्ताव में अड़ंगा डाल चुका था अतः इस बार फिर ऐसा करने पर एक आतंकवादी को बचाने के मुद्दे पर उसे दुनिया भर को सफाई देनी पड़ती। 

अंतः इस मामले की पूरी कार्रवाई के प्रस्ताव के कारण सार्वजनिक तौर पर उसके लिए अपनी भद्द उड़ना बचाना असंभव हो जाता। भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने इस संबंध में चीन, अमेरिका व रूस की यात्राएं कर उन्हें अपनी बात समझाने में कामयाब रहें।

भारत और चीन के बीच सुरक्षा परिषद पर भारत की सदस्यता, व्यापार असंतुलन व सीमा विवादो के चलते रहने के बाद वे उसे यह समझाने में सफल रहे कि यह एक द्विपक्षीय मामला नहीं है। चीन को पिछले कुछ समय से लग रहा था कि एक और वह अपने देश में मुस्लिम आतंकवादियों से जूझ रहा है व दूसरी तरफ आतंकवादी को बचा रहा है जिसके कारण अपने देश समेत पूरी दुनिया में उसके खिलाफ माहौल बनता जा रहा है। उन्हें वह समय याद आ गया जबकि अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी बिन लादेन को मारा था। 

दस  साल पहले भारत अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाददी घोषित करवाने के लिए प्रस्ताव लाने में सफल हुआ था तो चीन ने इस मामले में टांग अड़ा दी थी। वह आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का प्रमुख है व उसे 20 साल पहले एयर इंडिया का विमान अपहरण करने आतंकवादियों की रिहाई करके छुड़ाया गया था। भारत सरकार आम चुनावों के बीच हुए इस फैसले को बहुत बड़ी उपलब्धि मान रही है। 

ऐसे में आम आदमी के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उसे आतंकवादी घोषित करने से हमारा क्या फायदा है? आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद मसूद और उसके संगठन से जुड़ी संपत्ति चाहे किसी भी देश में क्यों न हो तुरंत जब्त कर ली जाएगी और उसे किसी तरह की कोई वित्तीय मदद नहीं मिलेगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या वह व उसका संगठन इतना मूर्ख है कि उन्होंने अपने नामों में कुछ तबदील न कर रखा हो। उसे दुनिया में कहीं भी जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वैसे भी वह कहां जा रहा है व कौन उसे लेने को तैयार है। कोई भी देश उसे हथियार मुहैया नहीं करवा सके। वह विमान व दूसरे हथियार नहीं खरीद सकेगा। 

पर यह सवाल तो अनुत्तरित है कि क्या पाकिस्तान उस पर मुकदमा चलवाए या अमेरिका की तरह भारत उसका सफाया करने में कामयाब हो जाएगा जो कि आज तक नहीं कर सका। फिर उसके अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित होने से हमें खुशी किसी बात की। जिसे लेकर सरकार लगातार अपनी पीठ ठोक रही है। उसे वह अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मान रही है क्या इससे भारत में आतंकवाद खत्म हो जाएगा।

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