• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 14 May, 2019 11:10 AM | Total Read Count 213
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भाजपा या कांग्रेस, क्या इसके अलावा कोई चारा नहीं?

ऋषिः सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में मतदान के छह चरण पूरे हो चुके हैं। अब आखिरी चरण बाकी है। जनवरी से ही चुनाव लड़ने की जोरदार तैयारियां शुरू हो गई थी। अब लड़ाई अपने अंतिम पायदान पर है। कौन किससे लड़ रहा था? भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, यह पानीपत की तीसरी लड़ाई थी। जहां लड़ाई होती है वहां एक दूसरे को निबटाने का लक्ष्य होता है। कौन किसको निबटा रहा था? मोदी ने कहा, हम कांग्रेस से लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने कहा, हम मोदी सरकार से लड़ रहे हैं। अगल-बगल में अन्य पार्टियां भी रहीं, जो या तो मोदी के समर्थन में है या विरोध में। पूरा महाभारत है। धर्म और अधर्म आमने-सामने है। प्रचार माध्यमों के जरिए कांग्रेस ने खुद को मोदी सरकार की प्रमुख विरोधी पार्टी घोषित कर लिया है। क्षेत्रीय स्तर पर दबदबा रखने वाली पार्टियों की अलग भूमिका है।

लोकसभा चुनाव में छठे चरण के मतदान से पहले अचानक राजीव गांधी का नाम उछला कि उन्होंने आईएनएस विराट पर छुट्टियां मनाई थीं। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने राजीव गांधी पर आक्षेप लगाए और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में दिवंगत राजीव गांधी के खिलाफ प्रचार करते हुए भाजपा के लिए वोट मांगे। मोदी सरकार अब तक की विश्व की सर्वश्रेष्ठ सरकार है। उसने युगांतरकारी कार्य किए हैं। पहली बार नरेन्द्र मोदी जैसा निष्कलंक प्रधानमंत्री देश को मिला है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के कार्यों के आधार पर वोट मांगने की हिम्मत नहीं दिखाई।

 उन्हें राजीव गांधी का नाम लेना पड़ रहा है। राजीव गांधी पर बोफोर्स मामले में दलाली का आरोप लगा था। उन्हें अदालत से क्लीन चिट मिली। फिर भी वह मरने के बाद भी बदनाम हो रहे हैं। इस देश में अन्य नेताओं, उद्योगपतियों पर भी भ्रष्टाचार के ज्यादा गंभीर आरोप हैं। उनकी तरफ मोदी और भाजपा का ध्यान क्यों नहीं है?

चुनाव में मोदी सरकार जनादेश मांग रही है। जनता ने तय कर लिया है कि मोदी सरकार को बने रहना चाहिए या नहीं। मतदान के छह चरण संपन्न हो चुके हैं। एक और बाकी है। इस चुनाव में कांग्रेस की भूमिका अपनी मौजूदगी दर्ज कराने से ज्यादा नहीं है। वह मैदान में आ गई है, इसलिए वोट पा रही है। उसका अपना कोई पराक्रम नहीं है। अगर मोदी सरकार कुछ अच्छे काम कर लेती तो कांग्रेस को कुछ करते नहीं बनता। यह इस देश की किस्मत है कि या तो उसे कांग्रेस को झेलना है या मोदी सरकार को। कांग्रेस ने बहुत उलटे काम किए हैं। भाजपा इतिहास के पन्ने पलटकर कोई न कोई घटना जनता को याद दिलाने का प्रयास करती है। मोदी भक्त प्रचार करते हैं कि कांग्रेस वैसी थी और मोदी सरकार ऐसी है। भाजपा कांग्रेस से बेहतर है, इसलिए भाजपा को वोट दो।

इस बार का लोकसभा चुनाव भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों को आइना दिखाने वाला मालूम पड़ रहा है। दशकों से ये दोनों पार्टियां पक्ष विपक्ष में बने रहकर जनता के सामने जो नाटक कर रही हैं, उसका पटाक्षेप इस बार हो जाएगा। कांग्रेस की सरकार अंतरराष्ट्रीय ताकतों के समर्थन से चलती थी। मोदी सरकार भी अंतरराष्ट्रीय ताकतों के समर्थन से चल रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, अमेरिका और ब्रिटेन इस समय पूरी दुनिया के कर्ताधर्ता हैं और विकासशील देशों को अपने हिसाब से चलाने में इन पांच ताकतों की बड़ी भू्मिका है। भारत सबसे बड़ा विकासशील देश है। विकासशील देशों को विकसित देशों के अधीन रहना पड़ता है।

भारत को विकसित बनाने में कांग्रेस की कोई रुचि नहीं रही। वह देश की जनभावनाओं का ध्यान रखते हुए अंतरराष्ट्रीय ताकतों से तालमेल बनाए रखती थी। कांग्रेस के शासन काल में जो विकास हुआ, वह जनता की मेहनत से हुआ। कांग्रेस को उसका श्रेय मिला। आधार कार्ड, आर्थिक नीतियां, अर्थ व्यवस्था को संगठित बनाने का प्रयास, मौद्रिक नीतियों का अंतरराष्ट्रीय ताकतों के हिसाब से निर्धारण आदि कार्य कांग्रेस नीत मनमोहन सिंह सरकार धीरे-धीरे कर रही थी।

 मोदी सरकार ने उन्हें एक झटके से लागू किया। लोगों पर भारी दबाव डालकर आधार कार्ड बनवाने के लिए मजबूर किया गया। नोट बदल दिए। जीएसटी लगा दिया। आयकर विभाग लोगों को सिर पर सवार हो गया। प्रवर्तन निदेशालय से लोग डरने लगे। ये सारी नीतियां मनमोहन सिंह सरकार ने कागज पर बना रखी थीं। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें बगैर सोचे-समझे, मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विचार-विमर्थ किए बगैर लागू कर दिया। नतीजा सामने है।

मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय ताकतों के अनुकूल नीतियां लागू करने में कांग्रेस से कई कदम आगे निकल गई है, इसलिए दुनिया भर में मोदी के नाम का डंका बजने लगा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि इस देश की जनता के साथ जबरदस्ती की जा सकती है, इसलिए वे विकसित देशों के प्रिय प्रधानमंत्री बन गए हैं। अब भाजपा और कांग्रेस की मिली-जुली रणनीति यह है कि देश को या तो भाजपा संभाले या कांग्रेस। भाजपा बहुमत के नजदीक है, इसलिए इस बार भाजपा को गठबंधन के आधार पर सरकार बनाने का मौका मिलने के आसार हैं। अगले लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत कर लेगी, तब राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल सकता है।   

क्या देश की जनता इस स्थिति को स्वीकार करेगी? 23 मई को जो नतीजे आने वाले हैं, उसमें बुरी तरह खंडित जनादेश देखने को मिलेगा और सरकार पर कब्जा करने की कोशिशें होंगी। या तो भाजपा के समर्थन से सरकार बनेगी, या कांग्रेस के समर्थन से। जो भी सरकार बनेगी, वह गठबंधन सरकार होगी और अंतरराष्ट्रीय ताकतें अपना खेल खेलेंगी। अगले 2024 के लोकसभा चुनाव तक छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों का उन्मूलन करते हुए राजनीति को पूरी तरह दो ध्रुवीय बनाने का प्रयास होगा। या तो भाजपा या कांग्रेस। देश में शासन का अमेरिकी मॉडल स्थापित करने का प्रयास होगा। देश इसी दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। आने वाले समय में भारी उथल-पुथल होगी, जिसके लिए जनता को तैयार रहने की जरूरत है।

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