अंतिम चरण के लिए दिग्गजों ने झोंकी ताकत


[EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 16 May, 2019 01:44 PM | Total Read Count 52
अंतिम चरण के लिए दिग्गजों ने झोंकी ताकत

देवदत्त दुबः लोकसभा चुनाव के लिए देश में 19 मई को अंतिम चरण का अंतिम चरण का मतदान होना है जिसमें मध्यप्रदेश की भी 8 सीटों पर वोट पड़ेंगे। इन सीटों पर प्रदेश के साथ-साथ देश के नेताओं ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दरअसल अंतिम चरण में राजनीतिक दल कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं और जहां-जहां से चुनाव हो चुके हैं वहां के नेताओं को भी इन सीटों पर लगा दिया है जिससे अंत में परिणाम अपने पक्ष में आ जाए। वैसे तो छह चरण चुनाव के देश में पूरे हो चुके हैं और अंतिम चरण आते-आते थकान नेताओं की बढ़ गई है लेकिन अंतिम अवसर मानकर कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता।

जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ते गए वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी चले और आक्रामकता भी बढ़ती गई खासकर पश्चिम बंगाल में जिस तरह का वातावरण गर्म हो गया है उससे वहां पर एक दिन पहले ही चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी गई है। देश के अन्य हिस्सों पर भी चुनावी माहौल मौसम की तरह गरमाया हुआ है। मध्य प्रदेश के मालवा इलाके की जिन 8 सीटों पर 19 मई को मतदान होना है वहां पर आदिवासी वोटर अधिकांश सीटों पर निर्णायक स्थिति में हैं। यही कारण है कि दोनों दलों ने इस वोट बैंक पर सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

बहरहाल 19 मई को मालवा क्षेत्र के मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, उज्जैन और देवास लोकसभा सीट पर मतदान होना है। इनमें से धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा और बड़वानी जैसे इलाके आदिवासी बाहुल्य हैं। इन सीटों पर जब-जब आदिवासी का झुकाव जिस दल की तरफ हुआ उस दल ने ही जीत हासिल की। वर्षों तक यह वर्ग कांग्रेस के साथ रहा लेकिन भाजपा ने इस वोट बैंक में सेंध लगाई।

खासकर संघ के अनुषांगिक संगठन वनवासी विकास परिषद ने जमीनी स्तर पर काम किया और आदिवासियों को भाजपा से जोड़ा और यहां विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में भाजपा को जीत भी मिलने लगी लेकिन जब झाबुआ लोकसभा का उपचुनाव हुआ और भाजपा संगठन एवं सरकार ने पूरी ताकत झोंकी, इसके बावजूद पार्टी चुनाव हार गई तब से ना केवल संघ की चिंता बढ़ गई बल्कि भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ गईं। हालांकि जयस और गोंगपा ने भी क्षेत्र में दखल बढ़ाया और कांग्रेस की मुश्किलें में बढ़ा दी।

यही कारण है कि कांग्रेस ने जयस के साथ समझौता किया और जयस के डॉ हीरालाल अलावा को टिकट देकर विधायक बनाया और लोकसभा के चुनाव में भी जयस के उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोका लेकिन कांग्रेस पार्टी में ही टिकट ना मिलने से नाराज जेवियर मेड़ा और गजेंद्र राजूखेड़ी अभी भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

ऐसे तो दोनों ही दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी इस क्षेत्र में सभाएं और रोड शो कर चुके हैं लेकिन प्रादेशिक नेता भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ और सरकार के लगभग एक दर्जन मंत्री इन क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं तो कांग्रेस संगठन से जुड़े अनेक नेता इस समय जिन 21 लोकसभा क्षेत्र में चुनाव हो जाने के कारण फुर्सत हो चुके हैं बे भी यहां पहुंच गए।

भाजपा की ओर से भी प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, संगठन महामंत्री सुहास भगत सहित सैकड़ों भाजपा नेता इन क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। संघ ने भी वनवासी परिषद के माध्यम से बूथ स्तर पर मोर्चा संभाला हुआ है क्योंकि जिस तरह से देशव्यापी माहौल बन रहा है उसमें अब दोनों दलों के लिए अब एक-एक सीट महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों ही दलों के आदिवासी नेता भी गांव-गांव घूम रहे हैं। कुल मिलाकर अंतिम चरण का मतदान देश के साथ-साथ प्रदेश में भी रोचक हो गया है क्योंकि दोनों ही दलों ने अब एक-एक सीट जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

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