मोदीजी ‘विभाजक’ अधिक; ‘सुधारक’ कम..!


[EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 14 May, 2019 10:58 AM | Total Read Count 51
मोदीजी ‘विभाजक’ अधिक; ‘सुधारक’ कम..!

ओमप्रकाश मेहताः भारत में लोकसभा चुनावों के दौर में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ‘टाइम’ पत्रिका ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी पर दस पृृष्ठीय विश्लेषण प्रस्तुत किया है, जिसके सात पृृष्ठों में मोदी जी को ‘विभाजक’ और लोक लुभावनवादी बताया गया है, जबकि तीन पृष्ठों में उन्हें ‘सुधारवादी’ बताया गया है।

‘टाईस’ पत्रिका के वरिष्ठ लेखक आतिश तासीर ने जहां अपने नाम के अनुसार भारतीय सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री जी के लिए ‘आतिश’ (विस्फोटक पदार्थ) का काम किया है, वहीं एक अन्य लेखक इवान ब्रेमर ने मोदी जी को ‘सुधारवादी’ बताने की कोशिश की है और उनके पांच साला कार्यकाल का विश्लेषण किया है।

अपने सात पृष्ठीय विश्लेषण में जहां आतिश तासीर ने अपनी ‘आतीशी तासिर’ बताने की कोशिश की और मोदी पर आरोप लगाया कि ‘‘वे एक बार फिर गढ़े हुए राष्ट्रवाद के सहारे सत्ता में आना चाहते हैं।’’ तासीर ने अपने विश्लेषण की शुरूआत 2014 से करते हुए मोदी जी द्वारा 2014 में लिए गए मनमोहक वादों का स्मरण किया तथा स्पष्ट रूप से कहा कि वे वादे आज भी अधूरे हैं और देश की आम जनता आज भी उनके पूरे होने की बाट जोह रही है।

 कहा गया है कि मोदी जी ने अपनी लोकप्रियता के विस्तार हेतु तुर्की, ब्राजील, ब्रिटेन और अमेरिका के भारतीय बहुसंख्यक वर्ग को साधने की कोशिश की। कहा गया कि मोदी ने देश के संस्थापक पितामहों जवाहरलाल के सिद्धांतों व अन्यों को बदनाम करने की कोशिशें की और अपने को इनसे अधिक राष्ट्रभक्त व सुधारक बताया।

 नेहरू के धर्म निरपेक्ष समाजवाद को खत्म करने का प्रयास किया। यह भी लिखा गया कि मोदी ने भारत के हिन्दुओं व मुसलमानों के बीच वैमनस्यता बढ़ाने की कोशिशें की। उन्होंने उदारवादी संस्कृति के बजाए धार्मिक राष्ट्रवाद, जातिवादी, कट्टरता व मुस्लिमों के प्रतिहीन भावना को आगे बढ़ाया। मोदी के शासनकाल में पुराने उच्च आदर्श शक्तिशाली ‘एलिट क्लॉस’ का खेल लगने लगे। मोदी ने अपने पांच वर्षीय शासनकाल में युवा, महिला, गरीब सभी की उपेक्षा की व इनके लिए किए गए वादों की पूर्ति पर ध्यान नहीं दिया, इस कारण बेरोजगारी का आंकड़ा दिन दूना रात चौगुना बढ़ता गया। इस विश्लेषण में आतिश ने गाय के नाम पर की गई कुछ हत्याओं का भी जिक्र किया। लिखा गया कि मोदी ने बिखरे हुए प्रतिपक्ष व राहुल गांधी की बचकानी हरकतों व अनुभवहीनता का पूरा राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की।

 मोदी अब अपने ही द्वारा गढ़े गए नव राष्ट्रवाद के सहारे पुनः सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं। वे पाकिस्तान, राष्ट्रवाद व सेना के शौर्य के बलबूते पर फिर से सत्ता में वापसी चाहते हैं, अपनी पांच साला उपलब्धियों के बल पर नहीं। आतिश ने आरोप लगाया कि भारतीय सांस्कृतिक अनुसंधान परिषद से लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय तक प्रशासकों व प्रोफेसरों का चयन योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि राजनीतिक समर्पण भाव के आधार पर किया। इस के बावजूद आतिश का कहना है कि अपनी भाषण कला के आधार पर वे फिर सत्ता हथिया सकते हैं।

एक ओर जहां आतिश तासीर ने सात पृष्ठों में मोदी जी की कथित असलियत उजागर करने की कोशिशें की वहीं शेष तीन पृष्ठों पर इवान ब्रेमर ने मोदी जी की तारीफ में लिखा कि- ‘‘मोदी पहले की तुलना में अब ज्यादा लोकप्रिय नतीजे दे सकते हैं।’’ लेखक की धारण है कि मोदी के विकास कार्यक्रमों ने लाखों लोगों के जीवनस्तर को बेहतर बनाया व बेहतर अवसर पैदा किये।

 ब्रेमर ने लिखा कि हालांकि भारत विश्व की सबसे तेज गति में बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था का स्पर्धी है, पर पिछली जनवरी में लीक एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 2017 में बेरोजगारी की दर पिछले 45 वर्षों में सबसे ज्यादा (6.1 फीसदी) रही, फिर भी मोदी ऐसे शख्स हैं जो अच्छे नतीजे दे सकते हैं। उन्होंने चीन, अमेरिका व जापान से संबंध सुधारे हैं व इन देशों से काफी अपेक्षाएं की जा रही हंै।

ब्रेमर के अनुसार मोदी ने सबसे पहले यह महसूस किया कि सरकार के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा हो, 2017 में लागू जीएसटी ने केन्द्र व राज्यों के पैंचीदा कर ढांचे को चुस्त-दुरूस्त करने का प्रयास किया जिसका लाभ अभी भी मिल रहा है। साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी धनराशि आवंटित की, माइक्रो-हाईवे, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और विमान तलों के निर्माण में विश्वस्तरीयता का ख्याल रखा।

लेखक ने यूपीए सरकार के समय के आधार कार्ड में सुधार तथा तीस करोड़ गरीबों के बैंक खाते खुलवाने का भी जिक्र किया। ऐसे कदमों ने भ्रष्टाचार में कमी की है। साथ ही जन स्वास्थ्य बीमा योजना से पचास करोड़ को लाभ मिलने व उज्जवला योजना से गरीब वर्ग में रसोई गैस कनेक्शन बांटने की भी तारीफ की गई। इस प्रकार पत्रिका के दोनों ख्यातनाम लेखकों ने मोदी जी पर सटीक व प्रभावी विश्लेषण पेश किया है, इससे मोदी जी को राजनीतिक लाभ मिलता है या उनकी छवि प्रभावित होती है? यह तो अगले सप्ताह ही पता चल पाएगा।

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