मोदी मैजिक पर प्रियंका का प्रहार और सवाल


[EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 14 May, 2019 11:07 AM | Total Read Count 135
मोदी मैजिक पर प्रियंका का प्रहार और सवाल

राकेश अग्निहोत्रीः भाजपा को सत्ता में वापसी के लिए जिस मोदी मैजिक पर  पूरा भरोसा उस पर प्रियंका गांधी ने अपने पहले दौरे में ही सवाल खड़े कर प्रहार किए...  देश के हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश की मालवा की मिट्टी से मोदी ने अपनी रणनीति को कारगर सिद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी तो प्रियंका ने अपने सियासी हित खूब साधे... मोदी और प्रियंका के वाराणसी में सीधे मुकाबले की संभावना पहले ही खत्म हो चुकी.. लेकिन मालवा के रतलाम में कुछ घंटों के अंतर से इन दोनों नेताओं ने अपने-अपने अंदाज में एक दूसरे को निशाने पर लिया...

पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी पर फोर्स युद्धपोत की बात आगे बढ़ाते हुए हमले जारी रखे तो दिग्गी राजा से लेकर कमलनाथ सरकार को आड़े हाथों लिया.. तो जवाब में महाकाल के दर्शन करने के बाद प्रियंका ने मोदी को कवि तपस्वी तो उससे आगे रक्षा विशेषज्ञ बताते हुए पलटवार के साथ जनता से वादाखिलाफी और मूल मुद्दों से भागने का गंभीर आरोप लगा कांग्रेस के इरादे साफ कर दिए.. ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि कांग्रेस और भाई राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताकत देने में आखिर प्रियंका गांधी कितनी सफल होंगी...

क्या महिला वोट बैंक और युवा का रुझान प्रियंका के हस्तक्षेप से कांग्रेस की ओर बढ़ेगा ..खासतौर से मध्य प्रदेश में जब चुनाव के अंतिम दौर में किला बचाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा के लिए राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने में जुटे.. तब आखिर प्रियंका गांधी की मालवा में एंट्री चुनाव परिणाम को किस हद तक प्रभावित करेगी... क्या राहुल और प्रियंका के भरोसे कमलनाथ की कांग्रेस मालवा में चमत्कार कर मोदी, शाह और शिवराज के अरमानों पर पानी भरने की कोशिश रंग लाएगी.. या फिर मोदी मैजिक और शाह की संगठन क्षमता विधानसभा चुनाव के जवाब के साथ राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तुलना में मध्य प्रदेश जहां पहले ही भाजपा सत्ता गंवा चुकी एक बार फिर नरेंद्र मोदी के लिए सत्ता वापसी में बड़ी भूमिका निभाएगा.

रतलाम में भीड़ के मापदंड पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा कुछ घंटे बाद हुई कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सभा पर भारी साबित हुई.. मोदी ने जहां एक बार फिर स्वर्गीय राजीव गांधी, उनके मित्र सैम पित्रोदा का मखौल उड़ाकर.. हुआ तो हुआ की बहस को आगे बढ़ाते हुए.. अब बहुत हुआ.. के नए डायलॉग के जरिए जनता का भरोसा जीतने की कोशिश की.. मोदी के भाषण में बस यही नया था.. बाकी सब पुराने मुद्दों को ही धार देने की कोशिश की.. क्षेत्र के महत्व को समझते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शहीदों की याद ताजा कर खासतौर से आदिवासी मतदाताओं के महत्व को बखूबी समझा ..

मोदी ने दिग्गी राजा के वोट ना डालने के फैसले पर सवाल खड़े कर यह साबित करने की कोशिश की कि भोपाल में सियासी चक्रव्यू में प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ दिग्गी राजा उलझ चुके हैं... नरेंद्र मोदी एक दिन पहले ही इंदौर में चुनाव प्रचार करके लौट चुके.. ऐसे में राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी का भगवा रंग में रंग कर उज्जैन में महाकाल के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद उज्जैन रतलाम में सभा का संबोधन और उसके बाद इंदौर रोड शो चर्चा का विषय बना.. जब एक ओर पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश से मायावती जैसी राजनीति की सबसे बड़ी महिला नेता नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत आरोप लगाकर अंतिम चरण के मतदान को गरमा चुकी हैं..

तब प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और केरल से दूर मध्यप्रदेश की धरती से नरेंद्र मोदी को तपस्वी बताकर तो कभी रफेल के मुद्दे उठाते हुए नरेंद्र मोदी के एयर स्ट्राइक से जूली बहस को एक नया मोड़ देने की कोशिश की.. प्रियंका ने उस खुलासे जिसमें एक इंटरव्यू में मोदी ने बादल रहते रडार की भूमिका बताई थी ..उस  पर सवाल खड़े कर तकनीक की आड़ प्रधानमंत्री की सोच का हंसते हुए ही सही मजाक उड़ाती नजर आई.. भीड़ के मापदंड पर नरेंद्र मोदी ने रतलाम सभा में जिन मुद्दों को हवा दे कर मालवा की राजनीति को गरमाया प्रियंका गांधी उसका जवाब इंदौर पहुंच कर दे पाई..

तो मोदी का आक्रामक अंदाज भी प्रियंका की मध्य प्रदेश में पहली सभा में तैयारियों का अभाव प्रबंधकों को सोचने को मजबूर कर गया... अलबत्ता प्रियंका ने आदिवासियों के बीच खुद को इंदिरा गांधी की पोती बता कर नेहरू-गांधी परिवार की आदिवासियों से अपने मार्मिक और आत्मीय रिश्तों की याद दिलाई.. इसके लिए उन्होंने मोदी सरकार को किसान विरोधी और उद्योगपतियों की सरकार बताते हुए जंगल जमीन जानवर की सुरक्षा का भरोसा दिलाया..  शाम ढलते और रात होते-होते इंदौर रोड शो के दौरान उमड़ी भीड़ प्रियंका की लोकप्रियता को रेखांकित कर गया..

इसे कमलनाथ और कांग्रेस का प्रबंधन के मोर्चे पर सफलता कहें या फिर प्रियंका के प्रति आम लोगों का आकर्षण जो भी कहो.. प्रियंका अपनी दादी इंदिरा गांधी की तर्ज पर सुरक्षा छोड़कर यदि आम जनता के बीच पहुंचे  तो पूरे रोड शो के दौरान उनका आकर्षक व्यक्तित्व लोगों को लुभा रहा था.. इस मौके पर प्रियंका ने नरेंद्र मोदी को रक्षा विशेषज्ञ बता कर व्यंग्य और कटाक्ष के जरिए उनकी काबिलियत पर सवाल खड़ा कर ही दिया.. प्रियंका ने दिन में रतलाम में मोदी द्वारा बाफोर्स और पिता राजीव गांधी उनके मित्र सैम पित्रोदा पर किए गए हमले का हिसाब इंदौर में बराबर किया.. कह सकते हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम चरण के मतदान से पहले नरेंद्र मोदी और प्रियंका गांधी आमने-सामने खड़े नजर आए तो मध्यप्रदेश की धरती पर..

 मोदी मध्यप्रदेश की कई यात्राएं कर चुके तो इस चुनाव में भी हर अंचल में लगभग उनकी चुनावी सभाएं हो चुकी.. लेकिन यह पहला मौका था जब प्रियंका गांधी अमेठी, रायबरेली और उत्तर प्रदेश से बाहर केरल, दिल्ली, पंजाब होते हुए पहली बार मध्य प्रदेश पहुंची.. प्रियंका ने जिस तरह मध्यप्रदेश के मालवा अंचल में 1 दिन के दौरे के दौरान अपनी सक्रियता के साथ छाप छोड़ी वह गौर करने लायक.. युवाओं खासतौर से महिलाओं के बीच उन्होंने अपनी छाप जरूर छोड़ी..

उसके बाद सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या कमलनाथ कांग्रेस को इसका फायदा अंतिम 8 सीटों के प्रचार में जीत के साथ इजाफे में मिलेगा.. खासतौर से उस इंदौर सीट पर  जहां आप सुमित्रा महाजन चुनाव नहीं लड़ रही  आखिर प्रियंका का जादू  क्या मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलेगा .. क्योंकि इंदौर  को भाजपा का गढ़ माना जाता है..  इन सीटों में सिर्फ रतलाम-झाबुआ ही कांग्रेस के पास है.. जो उसने मोदी लहर में गंवा दी थी.. लेकिन बाद में हुए उपचुनाव में कांतिलाल भूरिया लोकसभा तक पहुंचने में सफल रहे.. मालवा वही क्षेत्र है..

जहां से राहुल गांधी ने मंदसौर गोलीकांड के बाद किसान को न्याय और ऋण माफी का मुद्दा विधानसभा चुनाव में गरमाया था और लोकसभा चुनाव में इसे कांग्रेस के घोषणापत्र का हिस्सा बना दिया तो देखना दिलचस्प होगा कि संघ की प्रयोगशाला और मध्य प्रदेश की सत्ता की चाबी कहे जाने वाले इस मालवा क्षेत्र में प्रियंका गांधी की एंट्री से कांग्रेस कितनी अतिरिक्त सीटें हासिल करती है.. यह कहना गलत नहीं होगा कि अपने-अपने चुनाव से मुक्त हो चुके दिग्विजय सिंह हों या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रियंका गांधी के साथ नजर नहीं आए पूरे समय कमलनाथ तो सुरेश पचौरी ही उनके साथ रहे..

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