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संपादकीय-1

मुद्दा दोगुना आमदनी का

साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने के उपाय सुझाने के लिए बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट का अगला हिस्सा सरकार को सौंपा है। ये समिति चरणबद्ध ढंग से अपनी और पढ़ें....

जनरल के नीतिगत बयान

थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जिनका संबंध विदेश नीति से है। चूंकि ऐसे बयानों का सिलसिला बन गया है, इसलिए ये अनुमान लगाया जा और पढ़ें....

गायब हो गई गरमाहट?

इजराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू रविवार से भारत के चार दिनों के दौरे पर हैं। लेकिन उनका यहां आने के मौके पर वैसा माहौल नहीं बना, जैसा पिछले और पढ़ें....

न्यायपालिका का अपूर्व संकट

सुप्रीम कोर्ट में बेंचों के गठन के फिलहाल अपनाए जा रहे तरीके पर कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने सार्वजनिक रूप से जो सवाल उठाए हैं, उनसे सर्वोच्च न्यायालय और पढ़ें....

साहसी, मगर कितना उपयोगी?

बेशक केंद्र सरकार ने साहसी कदम उठाया है। लेकिन इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सचमुच कितना लाभ होगा, इस प्रश्न पर संदेह वाजिब कारण हैं। नरेंद्र मोदी सरकार और पढ़ें....

भूल-सुधार की नौबत क्यों?

सरकार ने रुख बदला और सुप्रीम कोर्ट ने भी। लेकिन ये पूरा प्रकरण अजीब है। यह ये भी बताता है कि सुप्रीम कोर्ट कैसे बिना किसी कानूनी आधार के भी आदेश जारी कर और पढ़ें....

धारा- 377 पर पुनर्विचार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराने वाली आईपीसी की धारा-377 पर फिर से विचार किया जाएगा। यानी 2013 में इस कोर्ट ने जो फैसला था, अब वह उस और पढ़ें....

खबर देने पर शामत!

वर्तमान सरकार का ये अजीबोगरीब तरीका है। मीडिया अगर उसकी किसी खामी को उजागर करे, तो पहली गाज ऐसा करने वाले मीडियाकर्मी पर गिरती है। कोशिश उस कमी को दूर और पढ़ें....

सच मानने से गुरेज!

नरेंद्र मोदी सरकार की यही सबसे बड़ी मुश्किल है। वह सच स्वीकार करना नहीं चाहती। कठोर हकीकत सामने हो, तो उसे उचित ठहराने के लिए वह तर्क ढूंढने लगती है। और पढ़ें....

‘आप’ की सियासी कसौटियां

कुमार विश्वास की आशाओं पर तुषारापात हुआ। मगर जिस तरह आम आदमी पार्टी (‘आप’) ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार तय किए, उससे उससे सहानुभूति रखने और पढ़ें....

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