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बीच मझधार में यूं फंसना

एक को मनाओ तो दूजा रूठ जाता है- भारतीय जनता पार्टी के साथ कुछ ऐसी ही मुसीबत है। अनुसूचित जाति- जनजातियों को मनाने के लिए एससी-एसटी ऐक्ट को दोबारा पारित कराया तो उसके खास वोटर- यानी सवर्ण समुदाय के लोग रूठ गए। अब पार्टी उन्हें मनाने में लगी है। इसकी ताजा मिसाल मध्य प्रदेश है। वहां के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते हफ्ते कहा कि उनके राज्य में एससी-एसटी कानून का दुरुपयोग नहीं होगा। इसके तहत बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी। अब इससे सवर्ण कितने संतुष्ट होंगे, यह तो आगे पता चलेगा, लेकिन फिर से अनुसूचित जातियों के भड़क उठने का अंदेशा पैदा हो गया है। जातीय राजनीति में उलझने का यह स्वाभाविक नतीजा है। भाजपा ने पहले चालाकी से ये खेल खेलने की कोशिश की। गुजरे चुनावों में वह काफी हद तक कामयाब भी रही। लेकिन बात उलझती लग रही है।

मध्य प्रदेश में कुछ महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में भाजपा को इस एक्ट के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में सतना में इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए गए। महिदपुर में मुख्यमंत्री के काफिले पर पथराव किया गया था। चूंकि बाकी पार्टियां इस संवेदनशील मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम उठा रही हैं, इसलिए शिवराज सिंह चौहान के ताजा बयान पर किसी विपक्षी पार्टी ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन देर-सबेर उन्हें भी जुबान खोलनी पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) क़ानून (एससी/एसटी क़ानून) में संशोधन किया था। निर्देश दिया था कि पूरी जांच के बाद ही इस कानून के तहत किसी की गिरफ्तारी हो। तब दलित संगठनों ने भारत बंद आयोजित किया। उसके बाद केंद्र ने नए सिरे से संसद से बिल पारित कराया।

उसके विरोध में कुछ दिन पहले सवर्ण संगठनों ने एक दिवसीय ‘भारत बंद’ का आयोजन किया था। मध्य प्रदेश में पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने मोदी सरकार के इस क़दम के विरोध में भाजपा से इस्तीफा दे दिया। तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटे जाने की आलोचना करते हुए कहा कि मात्र आरोप के आधार पर लोगों को बिना जांच के महीनों जेल में भेजना अत्याचार है।  ‘भारत बंद’ के दौरान मध्य प्रदेश के सभी पेट्रोल पम्प मालिकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। तब चौहान को चिंता हुई। लेकिन बयान मात्र से सवर्णों की चिंता को दूर करना आसान नहीं है। 

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