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शीघ्र न्याय की आकांक्षा

मधु कोड़ा को बहुचर्चित कोयला घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने दोषी ठहराया। उनके साथ-साथ झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव ए.के. बसु, खनन निदेशक विपिन बिहारी सिंह, नौकरशाह बीके भट्टाचार्य और पूर्व केंद्रीय कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता भी दोषी करार दिए गए हैं। ये फैसला बुधवार को आया। उसके एक दिन पहले खबर आई थी कि केंद्र ने 12 विशेष अदालतों के गठन का फैसला किया है, ताकि राजनेताओं के खिलाफ लंबित पड़े 1,571 आपराधिक मामलों की यथाशीघ्र सुनवाई हो सके। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इन न्यायालयों के गठन के लिए 7.8 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। केंद्र ने ये कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठाया। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने सरकार को राजनेताओं पर चल रहे आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय के गठन का रोडमैप तैयार करने को कहा था। मधु कोड़ा का मामला 2007 का है। यानी इस मुकदमे में निचली अदालत का निर्णय आने दस साल लगे। अभी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प सजायाफ्ता लोगों के पास है।

अनुमान लगाया जा सकता है कि वहां अंतिम निर्णय होने में अभी और कई साल लगेंगे। तो यह निर्विवाद है कि अपने देश में मुकदमो पर फैसले में अत्यधिक समय लगता है। कई बार इतना कि जब तक न्यायिक निर्णय आता है, सारा प्रसंग अप्रसांगिक हो चुका होता है। ऐसे में यह अपेक्षा गलत नहीं है कि मामलों का निपटारा यथाशीघ्र हो। यह कैसे संभव हो, यह हम सबकी चिंता का विषय होना चाहिए। लेकिन जब चिंता किसी खास समूह से संबंधित मामलों को लेकर जताई जाती है, तो ये बात समस्याग्रस्त हो जाती है। आखिर सिर्फ राजनेताओं से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा क्यों होना चाहिए? ऐसा सभी मामलों में क्यों नहीं होना चाहिए? तर्क दिया जाता है कि चूंकि राजनेताओं के हाथ में चूंकि देश की बागडोर रहती है, अतः दाग रहते हुए उनका लोगों की नुमाइंदगी करना अत्यंत अवांछित स्थिति है। इससे असहमत नहीं हुआ जा सकता।

लेकिन क्या यह संभव है कि आम न्याय व्यवस्था लेट-लतीफी से ग्रस्त रहे और राजनेताओं के मामलों का जल्द निपटारा हो जाए? गौरतलब है कि विशेष अदालतों के बाद भी आरोपी नेताओँ के पास उच्चतर न्यायपालिका में जाने का विकल्प रहेगा। आखिर वहां शीघ्र कार्रवाई कैसे सुनिश्चित होगी? और ऐसा किया गया तो क्या उसका असर बाकी मामलों पर नहीं पड़ेगा, जिनमें आम शख्स दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हो सकते हैं?

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