नैतिकता का सवाल कायम

जस्टिस एके सीकरी ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले उस पद को लौटा दिया, जिसकी पेशकश केंद्र सरकार ने की थी और जिसे लेने पर वे पहले राजी हो गए थे। पद से लेने से अपनी सहमति उन्होंने तब वापस ली, जब मीडिया में ये बात सामने आ गई। जाहिर है, इसे सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को हटाने के लिए दी गई उनकी सहमति से जोड़ कर देखा गया। तो जस्टिस सीकरी ने अपनी छवि को पहुंचे नुकसान की भरपाई की कोशिश की है। इसे एक सही दिशा में कदम मान जाएगा। लेकिन इससे नैतिकता का जो सवाल उठा, वह कायम है। सवाल है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों या किसी रिटायर नौकरशाह को रिटायरमेंट के बाद कोई पद क्यों स्वीकार करना चाहिए? ऐसा करना भी हो, तो इसके लिए कोई कूलिंग पीरियड यानी ऐसी निश्चित अवधि तय क्यों नहीं होनी चाहिए, जिसके बाद ही वे कोई पद ले सकें। वरना पद पर रहते हुए लिए गए उनके फैसलों को बाद में मिले पद से जोड़ कर देखने से लोगों को नहीं रोका जा सकेगा। खबर यह आई कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश एके सीकरी को लंदन स्थित राष्ट्रमंडल सचिवालय पंचायती ट्रिब्यूनल (सीएसएटी) में अध्यक्ष/सदस्य के खाली पद पर नामित करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आलोक वर्मा की सीबीआई निदेशक पद पर बहाली के बाद बीते गुरुवार को नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली चयन समिति ने 2:1 के फैसले से उनका तबादला कर दिया। समिति में मोदी के अलावा जस्टिस सीकरी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे। खड़गे ने इस फैसले पर अपनी असहमति का पत्र दिया। प्रधानमंत्री वर्मा को हटाना चाहते थे। इस लिहाज से जस्टिस सीकरी का वोट निर्णायक बन गया।

प्रधानमंत्री मोदी और जस्टिस एके सीकरी सीवीसी जांच के आधार पर आलोक वर्मा को हटाने का फैसला किया। लेकिन चयन समिति के इस फैसले की काफी आलोचना हुई है। यहां तक कि आलोक वर्मा मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के जांच की निगरानी करने वाले सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एके पटनायक ने कह दिया कि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अगुआई वाली समिति ने उन्हें हटाने के लिए बहुत जल्दबाजी में फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने इस फैसले को अनुचित बताया। इन टिप्पणियों से प्रधानमंत्री और जस्टिस सीकरी की राय और भी ज्यादा कठघरे में खड़ी हुई।  

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