कठघरे में अंडमान प्रशासन

संपादकीय-2
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बीते 16 नवंबर को मीडिया में अंडमान पुलिस और स्थानीय मछुआरों के हवाले से अमेरिका के एक युवा मिशनरी और दुस्साहसी घुमक्कड़ जॉन चाउ की सेंटिनल द्वीप पर मौत की खबर आई। बताया जाता है कि सेंटिनल आदिवासियों ने मारकर उनकी लाश द्वीप पर ही दफना दी। अंडमान पुलिस ने "अज्ञात आदिवासियों" के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया। अमेरिकी मिशनरी की लाश को निकालने के लिए भारतीय पुलिस जद्दोजहद कर रही है। लेकिन मानवशास्त्र विज्ञानियों, आदिवासी मामलों के जानकारों और पर्यावरण और पारिस्थितिकी के विशेषज्ञों ने ऐसी किसी कोशिश को कानूनी और नैतिक तौर पर गलत बताया है। उनका कहना है कि ये सेंटिनल आदिवासियों के जीने के अधिकार का उल्लंघन है। 2006 में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जब सेंटिनल द्वीप के तट के पास पहुंच गए दो मछुआरों को आदिवासियों ने मार कर वहीं बांस के डंडों पर लटका दिया था।

उस समय दबावों के बावजूद लाशें न उठाने का फैसला किया गया था, क्योंकि उससे सेंटिनल आदिवासियों के द्वीप पर गैरकानूनी दखल-सा हो जाता। कमोबेश वैसी ही स्थिति आज सामने है। लेकिन हैरानी है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने ही इस साल अगस्त में यही नियम लचीला कर दिया था, जिसके आधार पर संभावना है कि जॉन चाउ वहां जाने का दुस्साहस कर बैठा। मछुआरे भी उसे ले जाने को तैयार हो गए। अंडमान के 29 समूहों को इस साल पर्यटन के लिए खोल दिया था, जिनमें ये उत्तरी सेंटिनल द्वीप भी एक है। यानी ये द्वीप, निषिद्ध क्षेत्र परमिट (आरएपी) के दायरे से बाहर कर दिए गए। अंडमान निकोबार के द्वीपों में से एक विलुप्ति की कगार पर आ गए सेंटिनल आदिवासियों का द्वीप है। इनकी संख्या अब करीब 100 के करीब बताई जाती है। माना जाता है कि सेंटीनल आदिवासी करीब 60 हजार वर्षों से घुमंतु शिकारियों की तरह वहां रहते आए हैं।

70 और 90 के दशकों में भी उनसे संपर्क की नाकाम कोशिशें हुई थीं। अब मुद्दा यह है कि अमेरिकी मिशनरी को क्यों उस इलाके में जाने दिया गया? क्यों ये असावधानी बरती गई? ये एक नाजुक मामला है। जानकारों ने कहा है कि कठघरे में पुलिस है। ये उसका कर्त्तव्य है कि वह स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाए, उनका पालन सुनिश्चित करे। अंडमान के निर्धारित पर्यटन स्थलों के होटलों और लॉज मालिकों को ताकीद किया जाए कि कोई भी ऐसा यात्री जो किसी तरह की ऐसी मंशा जाहिर करे, तो उसके बारे में पुलिस को सावधान किया जाए।

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