किसानों से इतनी बेरूखी!

संपादकीय-2
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किसानों ने फिर दिल्ली पर दस्तक दी। उनके मंच पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा। लेकिन सरकार की तरफ से उनसे कोई संवाद कायम नहीं किया गया। उलटे कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने लंबा बयान जारी कर किसानों के आंदोलन को बीजेपी बनाम कांग्रेस का रंग देने की कोशिश की। साथ ही दावा किया कि किसानों के लिए मोदी सरकार ने जितना किया है, उतना उसके पहले की किसी सरकार ने नहीं किया। लेकिन उन्होंने यह नहीं समझाया कि जब ऐसा है तो फिर हजारों किसान आक्रोश जताने दिल्ली क्यों आए हैं। अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान पहले इकट्ठा हुए। वे प्रदर्शनकारी कर्ज माफी और अपने उत्पादों के लिए उचित दाम की मांग कर रहे थे। किसान आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। किसानों ने कहा कि उन्हें राम मंदिर या राम मूर्ति के बजाय कर्ज माफी और अपने उत्पादों का लाभकारी मूल्य चाहिए।

उन्होंने नाराजगी जताई कि हमारे लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है, लेकिन सरकार राम मंदिर के जरिए लोगों का ध्यान किसानों के मुद्दों से भटकाना चाहती है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे किसान ट्रेनों, बसों एवं अन्य परिवहन माध्यमों से दिल्ली पहुंचे। एआईकेएससीसी किसानों एवं खेतिहर कामगारों के 209 संगठनों का मोर्चा है। दिल्ली जल बोर्ड ने किसानों को पानी मुहैया कराया। आम आदमी पार्टी के एक विधायक ने खाना मुहैया कराया। दिल्ली के पांच गुरुद्वारों ने किसानों की मदद की। एआईकेएससीसी ने कहा कि दो दिवसीय मार्च दिल्ली में किसानों का सबसे बड़ा प्रदर्शन रहा। गुरुवार को रामलीला मैदान में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण भारत के कई जाने माने गायक एवं कवियों ने प्रस्तुति की। इससे पहले बीते 22 नवंबर सूखे के लिए मुआवज़े और आदिवासियों को वन्य अधिकार सौंपे जाने की मांग को लेकर हज़ारों किसान एवं आदिवासियों ने महाराष्ट्र के ठाणे से मार्च करते हुए दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान पहुंचे थे।

आठ महीने पहले भी किसान नासिक से ऐसा ही मार्च निकालकर मुंबई पहुंचे थे। पिछले साल नवंबर में किसानों ने दिल्ली किसान संसद का आयोजन किया था। इस साल पांच सितंबर को अखिल भारतीय किसान सभा ने बड़ा प्रदर्शन संसद मार्ग पर किया। लेकिन उन मौकों की तरह ही इस बार भी सरकार ने गौर नहीं किया। यह अफसोसनाक है।  
 

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