गूगल में मी-टू आंदोलन

संपादकीय-2
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गूगल के कर्मचारी यौन उत्पीड़न को लेकर कंपनी के रवैये से नाराज हैं, यह एक बार फिर जाहिर हुआ। अपनी नाराजगी को दिखाने के लिए उन्होंने पिछले हफ्ते "गूगल वॉक आउट फॉर रियल चेंज" नाम से प्रदर्शन किए। इसी नाम से ट्विटर पर एक पेज भी बनाया गया है। वहां दुनिया भर से लोग अपने दफ्तर की तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं। प्रदर्शन के समय सिंगापुर, टोक्यो, बर्लिन, ज्यूरिख, लंदन और डबलिन समेत दुनिया भर के गूगल के दफ्तरों के बाहर भीड़ जुटी। भारत में गूगल कंपनी में 2,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इनमें से भी कई कर्मचारियों ने ही इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। साफ तौर पर यह मी-टू आंदोलन के बढ़ने का संकेत है। अब भारत में भी मी-टू पर खुल कर बहस होने लगी है। हालिया प्रदर्शनों की वजह न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक खबर है। उसके अनुसार एंडी रुबिन को कंपनी छोड़ने के लिए नौ करोड़ डॉलर दिए गए। एंडी रुबिन एंड्रॉइड के सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं। उन पर महिला सहकर्मी के यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। कंपनी ने जांच की और उन्हें दोषी भी पाया। लेकिन नौकरी से निकलने के लिए उन्हें मोटी रकम अदा की गई। रुबिन गूगल से जुड़े एकमात्र कर्मचारी नहीं हैं जिन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हों। बड़े ओहदों पर काम कर रहे और भी कई लोगों के नाम सामने आए हैं। 

गूगल के ‘एक्स लैब’ के निदेशक रिचर्ड दे वॉल पर भी आरोप लगे। बावजूद इसके वे नौकरी में बने रहे। हाल ही में जब कंपनी के अंदर आवाजें जोरों से उठने लगीं, तो उन्होंने बीते हफ्ते इस्तीफा दे दिया। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को कंपनी के इस रवैये के लिए माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने कंपनी के सभी कर्मचारियों को ईमेल लिखा। इसमें कहा- मैं इस समस्या पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हूं जो इतने लंबे समय से हमारे समाज में और यहां गूगल में भी बनी हुई है। लेकिन अपने इस ईमेल में पिचाई ने ना ही रुबिन का नाम लिया, और ना दे वॉल का। इस बीच गूगल ने इस बीच 48 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इनमें 13 सीनियर मैनेजर शामिल हैं। कंपनी दिखाना चाह रही है कि यौन उत्पीड़न को वहां किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जबकि कर्मचारियों का कहना है कि ऊंचे ओहदों पर मौजूद लोगों के खिलाफ कंपनी में कार्रवाई करना अब भी बेहद मुश्किल है। 

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