इंसान बनाम वन्य जीव!

संपादकीय-2
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कुछ दिनों के अंतर पर भारत में दो बाघिनें मारी गईं। ये घटनाएं ऐसे समय हुईं, जब दुर्लभ होते बाघों को बचाने की पूरी दुनिया में जोरशोर से मुहिम चल रही है। बाघों की सबसे बड़ी आबादी वाले भारत में फिलहाल बाघों की गिनती हो रही है। इस गणना की अंतिम रिपोर्ट अगले जनवरी में जारी होगी। महाराष्ट्र के यवतमाल के पंढारकावड़ा वन क्षेत्र में 53 दिन के तलाशी अभियान, 200 कर्मचारियों के लाव-लश्कर, संदेशवाहकों, ट्रैप कैमरा, ड्रोन, खोजी कुत्तों, हैंगग्लाइडर के साथ निकले शार्पशूटर्स ने 13 लोगों को शिकार बना चुकी छह साल की अवनी नाम की बाघिन को पिछले दिनों गोली से मारा डाला। महाराष्ट्र के वन विभाग और राज्य सरकार ने इस मौत पर राहत की सांस ली। गांव वालो ने पटाखे छोड़े।लेकिन इस कार्रवाई से सामाजिक कार्यकर्ता और वन्यजीव प्रेमी नाराज हुए। उनका दावा है कि वोबाघिन आदतन हमलावर नहीं थी। यह आरोप भी है कि वन विभाग ने सामान्य प्रावधानों की अनदेखी की। मिसाल के लिए ट्रैंक्विलाइजर दागा गया, लेकिन वह प्रभावी नहीं हुआ।

सवाल उठा है कि ऐसा क्यों हुआ? क्या ऐसा जानबूझकर होने दिया गया ताकि गोली मारने की कार्रवाई को तर्कसंगत ठहराया जा सके? तलाशी दल के साथ पशु-चिकित्सक नहीं था। यह भी पूछा गया है कि मारे जाने के समय उसके बच्चे बाघिन से अलग थे या उन्हें अलग किया गया? वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बिना मां के उसके छौने तो भटक कर दम तोड़ देंगे। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया था जिसने हिदायत थी कि पहले बाघिन को जिंदा पकड़ने की कोशिश की जाए। वन विभाग का दावा है कि पूरा अभियान सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों पर ही चलाया गया था।गांव वालों की शिकायतों, उनके रात दिन के डर, उन पर हुए हमलों और लगातार मौतों को भी कार्रवाई का आधार बनाया गया। लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि वन विभाग का बुनियादी काम वन्यजीव संरक्षण का है। अवनी कोमारने के दो दिन बाद उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघिन को मारने का काम स्थानीय गांव वालों ने खुद ही कर डाला। एक ग्रामीण की मौत से गुस्साए लोगों ने संरक्षित वन क्षेत्र में घुसकर एक ट्रेक्टर से बाघिन को रौंद डाला। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बाघों के साथ टकराव बढ़ने की वजह यह है कि जंगल क्षेत्र में मनुष्य की घुसपैठ बेकाबू हो गई है। इससे समस्या बढ़ी है। मुद्दा यह है कि क्या इसका कोई ऐसा हल सकता है, जिसमें इंसान और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रहें?

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