डॉनल्ड ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैतिनो से बात की। उसके तुरंत बाद फीफा ने अमेरिकी खिलाड़ी से रेड कार्ड वापस लेने का एलान किया, जिससे फुटबॉल की पूरी दुनिया भौंचक रह गई है।
कुछेक मौकों को छोड़ कर फुटबॉल वर्ल्ड कप वैश्विक उत्सव का मौका रहता आया है। मगर 2026 का टूर्नामेंट उन कुछेक मौकों में शामिल हो गया है, जिन्हें विवाद और खेल की पवित्रता भंग किए जाने के लिए याद किया जाता है। ताजा मुद्दा अमेरिका के स्ट्राइकर फ्लोरेन बोलोगन को मिले रेड कार्ड की वापसी का है। बोलोगन को बोस्निया-हर्जेगोविया के खिलाफ राउंड ऑफ 32 के मैच में रेड कार्ड मिला। उस कारण प्री क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम के खिलाफ मैच से उन्हें बाहर हो जाना था। लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने हस्तक्षेप किया। डॉनल्ड ट्रंप ने फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैतिनो से बात की। उसके तुरंत बाद फीफा ने रेड कार्ड वापस लेने का एलान किया, जिससे फुटबॉल की पूरी दुनिया भौंचक रह गई है। इस घटना को 1934 में इटली के तानाशाह बेनितो मुसोलिनी और 1978 में अर्जेंटीना के सैनिक तानाशाह जॉर्जे रफायल विडेला के वर्ल्ड कप टूर्नामेंट को अनुचित ढंग से प्रभावित करने के उदाहरणों से जोड़ा गया है।
तब इटली और अर्जेंटीना मेजबान थे और वे चैंपियन हुए। उस तरह की घटना 21वीं सदी में दोहराई जाएगी, यह बात लोगों की कल्पना से बाहर थी। इस बार वैसे तो फीफा आरंभ से ही ट्रंप के आगे समर्पण भाव में रहा, मगर बोलोगन से जुड़ी घटना हद पार कर जाने जैसा है। गौरतलब है, फीफा इस बार आई टीमों के सभी सदस्यों को वीजा दिलवाने और सबको समान धरातल मुहैया कराने का अपना दायित्व निभाने में विफल रहा। उधर इन्फैतिनो ट्रंप की मिज़ाज-पुर्सी में हद पार करते दिखे हैं। पुरस्कारों के लिए ट्रंप की बेसब्री को देखते हुए ह्वाइट हाउस जाकर उन्होंने कथित फीफा शांति पुरस्कार उन्हें प्रदान किया, जो पहली बार किसी को मिला है। खिलाड़ियों, कोच, रेफरी और टीमों के अधिकारों के पक्ष में खड़ा होने की जरूरत उन्होंने नहीं समझी। खासकर ईरान के साथ जैसा सलूक हुआ, उसकी निंदा दुनिया भर में हुई। इससे फीफा का पहले से दागदार रिकॉर्ड अब और अंधकारमय हुआ है। उसके दोहरे मानदंडों की चर्चा अब यूरोपीय देश भी कर रहे हैं, जो फीफा के पक्षपाती रुख के लाभार्थी रहे हैँ।
