बीमा पॉलिसियों की बिक्री के दौरान कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव सही दिशा में पहल है। शेयर बाजार की अतार्किक प्रतिक्रिया से बिना प्रभावित हुए इरडा को इस सुझाव पर कायम रहना चाहिए।
बीते 24 सितंबर को शेयर सूचकांकों में भारी गिरावट आई, तो उस क्रम में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के नए परामर्श पत्र पर ध्यान गया। इस पत्र में इरडा ने बीमा पॉलिसी देने, उसके ढांचे, खर्च, और कमीशन में सुधार के सुझाव दिए हैं। इस पर सभी हितधारकों से 25 अक्टूबर तक अपनी राय भेजने को कहा गया है। इसके तहत जीवन बीमा पॉलिसी में पहले साल का कमीशन वितरकों के लिए प्रीमियम का अधिकतम 20 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 25 प्रतिशत पर सीमित करने का प्रस्ताव है। यह मौजूदा कमीशन के आधे से भी कम है।
गौरतलब है, 2023 में कमीशन संबंधी सीमाएं हटा दी गई थीं। उससे इस कारोबार में असंतुलन पैदा हुआ। गलत ढंग से पॉलिसियों की बिक्री (मिस-सेलिंग) की शिकायतें बढ़ीं। एक आकलन के मुताबिक 2022-23 से 2024-25 के बीच सामान्य बीमा में ब्रोकरों का प्रीमियम 37 फीसदी बढ़ा, पर कमीशन 173 फीसदी। जीवन बीमा में कॉरपोरेट एजेंटों का प्रीमियम 28 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कमीशन 125 प्रतिशत। इसलिए कहा जाएगा कि इस पर सीमा लगाने का प्रस्ताव सही पहल है। शेयर बाजार की अतार्किक प्रतिक्रिया से बिना प्रभावित हुए इरडा को इस पर कायम रहना चाहिए।
आम समझ है कि किसी व्यक्ति के लिए सबसे अच्छी बीमा पॉलिसी वह होगी, जो सस्ती और जरूरत के अनुरूप हो। लेकिन हो यह रहा है कि जिस पॉलिसी में एजेंट या बैंक को सबसे ज्यादा कमीशन मिलता हो, वे उसी को बेचने में जोर लगाते हैं। इस क्रम में खरीदारों को भ्रामक फायदे बताए जाते हैं। उपभोक्ताओं की नजर से देखें, तो कमीशन पर सीमा लगने से एक लाभ तो यह होगा कि विक्रेता की दिलचस्पी ऊंचे कमीशन वाले उत्पाद से हटकर से सही उत्पाद की ओर लौट सकती है। पॉलिसी की ऑनलाइन बिक्री में भ्रामक तरीके घट सकते हैं। साथ ही बीमा उपभोक्ताओं में जागरूकता लाने की बड़ी जरूरत भी बनी हुई है, ताकि पॉलिसी लेते समय वे कवर, क्लेम-निपटान अनुपात, शुल्क, और किन मामलों में कंपनी लाभ देने से इनकार कर सकती है, आदि की पूरी जानकारी हासिल कर सकें। इसमें इरडा की सर्व-प्रमुख भूमिका है।
