इस सदी में भारतीय मध्य वर्ग के विस्तार और उसे सहारा दिए रहने का प्रमुख स्रोत टेक सेक्टर रहा है। वहां अवसर सिकुड़ने और उस स्रोत से आमदनी में गिरावट का सीधा असर उपभोक्ता बाजार पर पड़ेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह खबर चिंताजनक है कि इस वर्ष सूचना तकनीक क्षेत्र में कर्मचारियों की वेतन वृद्धि (अप्रेजल) निराशाजनक रही है। टेक पेशेवरकर्मियों के ऐप ब्लाइंड के सर्वे से सामने आया है कि 35 प्रतिशत कर्मचारियों को या तो कोई वेतन वृद्धि नहीं मिली, या वेतन कटौती का सामना करना पड़ा। इसमें 30 प्रतिशत के वेतन में शून्य बढ़ोतरी हुई, जबकि पांच प्रतिशत की सैलरी घटी। यह सर्वे 2,178 टेक प्रोफेशनल्स को शामिल करते हुए किया गया। इससे सामने आई स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक से पांच प्रतिशत की मामूली वृद्धि को जोड़ लें, तो कुल 59 प्रतिशत कर्मचारियों की वेतन वृद्धि पांच प्रतिशत या उससे कम रही।
2025 में ऐसे कर्मचारियों की संख्या सिर्फ 34 प्रतिशत थी। जानकारों के मुताबिक इसका कारण कर्मचारियों का खराब प्रदर्शन नहीं है। बल्कि सर्वे के दौरान 41 प्रतिशत लोगों ने कंपनी की खराब वित्तीय हालत या लागत में कटौती को कारण बताया, जबकि 18 प्रतिशत ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और ऑटोमेशन को जिम्मेदार माना। एआई की लागत सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है। कई कंपनियों ने बढ़ते एआई और सर्वर खर्च के कारण कर्मचारियों की वेतन वृद्धि को फ्रीज कर दिया है। इस घटनाक्रम का असर बेशक कर्मचारियों की संतुष्टि पर पड़ रहा है। ये बात ब्लाइंड सर्वे से भी सामने आई है।
इसका असर आने वाले समय में उनके प्रदर्शन पर पड़ सकता है, जिसका एक नतीजा उनकी नौकरी का खतरे में पड़ना होगा। दरअसल, सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें अब वेतन वृद्धि से ज्यादा छंटनी का डर सता रहा है। लेकिन बात सिर्फ उन कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी। इस सदी में भारतीय मध्य वर्ग के निर्माण, विस्तार और उसे सहारा दिए रहने का प्रमुख स्रोत टेक सेक्टर रहा है। वहां अवसर सिकुड़ने और इस स्रोत से होने वाली आमदनी में गिरावट का सीधा असर उपभोक्ता बाजार पर पड़ेगा, जिससे पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। इस आशंका को लेकर काफी समय से चेतावनी दी जाती रही है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसके बावजूद लाचारी जैसी स्थिति बनी हुई है।
