Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

शीघ्र एवं उचित न्याय

असल सवाल है कि महिलाओं का सशक्तीकरण कैसे हो? उनको लेकर मौजूदा नजरिया कैसे बदले? इन पर गंभीर विचार और ठोस पहल के बजाय हो चुके अपराध में मृत्यु दंड की मांग पलायन का रास्ता है, जो खासकर राजनेताओं को अधिक पसंद आता है।

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल बलात्कार कांड की जांच टीम ने जिस तेजी से साक्ष्य जुटाए और सियादह अदालत मामले को जैसी प्राथमिकता दी, वह काबिल-ए- तारीफ है। नौ अगस्त 2024 को हुई इस बहुचर्चित घटना में कोर्ट ने मुजरिम संजय रॉय को उम्र कैद सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। विशेष जज अनिर्बान दास की प्रशंसा होनी चाहिए कि इतने हाई प्रोफाइल मामले में बने जन-दबाव में वे नहीं आए। जुर्म के अनुपात में सजा के सिद्धांत पर इसांफ कायम रहे।

उन्होंने कहा कि यह मामला जघन्यतम अपराध की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए उन्होंने दोषी को मृत्यु दंड नहीं सुनाया। चूंकि पश्चिम बंगाल में राजानीतिक दलों के बीच इस मामले को लेकर खुद को महिला सुरक्षा का अधिक समर्थक दिखाने और दूसरे पक्ष पर तोहमत लगाने की सियासी होड़ छिड़ी थी, तो स्वाभाविक ही है कि फैसला आने के बाद उसका नया दौर देखने को मिल रहा है। चूंकि केस सीबीआई को सौंप दिया गया था, तो अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निर्णय पर असंतोष जताने का मौका मिला है। उन्होंने कहा है कि अपराधी को मृत्यु दंड दिलवाने के लिए वे हाई कोर्ट जाएंगी। मगर तजुर्बा यह है कि ऐसे मामलों में अक्सर असल मद्दे से ध्यान हटाने के लिए मृत्यु दंड की मांग गरम की जाती है।

असल मुद्दा महिलाओं को दोयम दर्जे का मानने का सामाजिक नजरिया है, जिस कारण उन पर विभिन्न तरह के अपराध रोज हो रहे हैं। सिर्फ दर्ज मामलों का जिक्र करें, तो 2023 की एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 के मुकाबले 2022 में महिलाओं के प्रति अपराध में चार प्रतिशत का इजाफा हुआ। देश भर में महिलाओं के प्रति अपराध की हर घंटे औसतन 51 शिकायतें दर्ज हुईं। पश्चिम बंगाल में हालात इससे अलग नहीं है। असल सवाल है कि महिलाओं का सशक्तीकरण कैसे हो और उनको लेकर मौजूद पारंपरिक नजरिया कैसे बदले? इन प्रश्नों पर गंभीर विचार और ठोस पहल करने के बजाय हो चुके अपराध में मृत्यु दंड की मांग पलायन का रास्ता है, जो खासकर राजनेताओं को अधिक पसंद आता है।

Exit mobile version