Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

अविश्वास ऑन- रिकॉर्ड

अविश्वास प्रस्ताव ओम बिरला के खिलाफ के जारी एवं गहराती गई शिकायतों को ऑन- रिकॉर्ड लाने की विपक्ष की कोशिश का हिस्सा है। वरना, विपक्ष भी अवगत रहा है कि इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना नहीं है।

संसदीय लोकतंत्र में पीठासीन अधिकारी पर सदन का कोई पक्ष अविश्वास जताए, तो उस पर खेद ही प्रकट किया जा सकता है। लेकिन भारत अभी ऐसे ही अफसोसनाक दौर में है। हाल के वर्षों में विपक्षी दलों में यह शिकायत गहराती चली गई है कि संसद के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों के लिए सत्ताधारी दल की प्राथमिकताएं संसदीय मर्यादा से अधिक अहम हो गई हैं। दोनों सदनों में इल्जाम लगाए जा चुके हैं कि पीठासीन अधिकारी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के “एजेंट” के रूप में काम कर रहे हैं।

लोकसभा में तो एक मौके पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने खुलेआम कहा था कि प्रधानमंत्री और विपक्षी नेताओं से मुलाकात के दौरान स्पीकर ओम बिरला का व्यवहार और हाव-भाव अलग-अलग होता है। तृणमूल कांग्रेस के एक सदस्य ने इल्जाम लगाया था कि बिरला सत्ता पक्ष के सदस्यों को नेहरू युग की घटनाओं का उल्लेख करने की इजाजत देते हैं, लेकिन विपक्ष के सदस्य अगर नोटबंदी जैसी अपेक्षाकृत हालिया घटनाओं का जिक्र करें, तो उसे कार्यवाही से निकाल देते हैं। ऐसे आरोपों की शृंखला बहुत लंबी हो चुकी है। बिरला के खिलाफ के विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को इसी संदर्भ में देखा जाएगा।

इसे जारी एवं गहराती गई शिकायतों को ऑन- रिकॉर्ड लाने की विपक्ष की कोशिश का हिस्सा माना जाएगा। वरना, विपक्षी दल भी वाकिफ रहे हैं कि सदन का गणित उनके पक्ष में नहीं है और इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना नहीं है। प्रस्ताव पर बहस से पहले प्रधानमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री ने बिरला का जोरदार बचाव कर स्पष्ट कर दिया कि सत्ता पक्ष मजबूती से उनके हक में खड़ा है। अतः सत्ता पक्ष में इस पर किसी पुनर्विचार की संभावना तक नहीं है कि आखिर विपक्ष इस हद तक क्यों गया और क्या उसकी शिकायतों को दूर करने के लिए कुछ किया जाना चाहिए? नतीजतन, स्पीकर के खिलाफ विपक्ष की आपत्तियां संभवतः यथावत बनी रहेंगी, जिनका साया सदन की आगे की कार्रवाहियों पर पड़ता रहेगा। उस स्थिति में संवाद एवं अधिकतम सहमति निर्माण के मंच के बतौर सदन के आगे भी अपेक्षित भूमिका निभाने की उम्मीद कम ही है।

Exit mobile version