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अमेरिकी फैसले की आंच

Pegasus case

पेगासस मामले में अमेरिकी अदालत में इजराइली कंपनी एनएसओ को दोषी पाया गया है। अनेक देशों में पेगासस के जरिए राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों, और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की प्राइवेसी भंग करने के आरोप लगे थे। इनमें भारत भी शामिल था।

अमेरिका में एक जिला कोर्ट ने जासूसी सॉफ्टेवेयर पेगासस की निर्माता कंपनी एनएसओ को मेसिंग माध्यम ह्वाट्सऐप की गोपनीयता तोड़ने का दोषी पाया है। एनएसओ पर ह्वाट्सऐप की मालिक कंपनी मेटा ने मुकदमा किया था। अदालत ने पाया कि एनएसओ ने अमेरिका के कंप्यूटर फ्रॉड और दुरुपयोग कानून (सीएफएफए) का उल्लंघन किया। उसके सॉफ्टवेयर के जरिए ह्वाट्सऐप की सेवा शर्तों का उल्लंघन किया गया। इन शर्तों के तहत ह्वाट्सऐप दावा का है कि उसके जरिए भेजे गए मेसेज पूरी तरह इन्क्रिप्टेड यानी गोपनीय हैं। मेटा की ह्वाट्सऐप शाखा के प्रमुख विल कैथकार्ट ने फैसले को प्राइवेसी की बड़ी जीत बताया।

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अनुमान है कि इस फैसले का दूरगामी प्रभाव होगा। अनेक देशों में पेगासस के जरिए राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों, और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की प्राइवेसी भंग किए जाने के आरोप लगे थे। इनमें भारत भी शामिल था। यहां जिन लोगों की निजता भंग करने का इल्जाम लगा, उनमें कई विपक्षी नेता भी हैं। कई खोजी रिपोर्टों में दावा किया गया था कि भारत सरकार ने इजराइली कंपनी से इस सॉफ्टवेयर की खरीदारी की। जब ये विवाद भड़का था, तब एनएसओ ने भी कहा था कि उसने इस सॉफ्टेवेयर की बिक्री सिर्फ सरकारों को की है। लेकिन भारत सरकार ने इस बारे में कभी विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दिया।

अमेरिका में सुनवाई के दौरान एनएसओ ने कैलिफॉर्निया स्थित कोर्ट के उस निर्देश का उल्लंघन किया, जिसमें उससे पेगासस के सोर्स कोड पेश करने को कहा गया था। कंपनी ने दलील दी कि सोर्स कोर्ड सिर्फ इजराइल में मौजूद किसी इजराइली नागरिक को ही दिखाया जा सकता है। कोर्ट ने कंपनी के इस रुख को अस्वीकार कर दिया। अमेरिकी न्यायालय के इस निर्णय की रोशनी में यह सवाल उठेगा कि इस मामले पर भारतीय अदालतों में नए सिरे से सुनवाई क्यों नहीं होनी चाहिए- खासकर यह देखते हुए इससे पीड़ित लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय शामिल थे? ह्वाट्सऐप की प्राइवेसी भंग की गई, यह अब साबित हो गया है। इस मेसेजिंग ऐप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारत में ही होता है। इसलिए यह कहना तार्किक होगा कि इस पूरे मामले की नए सिरे से न्यायिक जांच होनी चाहिए।

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