कई राज्यों में कई अस्पतालों के आयुष्मान भारत कार्ड पर इलाज ना करने की छिटपुट खबरें पहले भी आती रही हैं, मगर यह संभवतः पहला मौका है, जब किसी राज्य के अस्पतालों ने सामूहिक रूप से ऐसा फैसला किया हो।
हरियाणा के 600 से भी ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों ने इस महीने से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (यानी आयुष्मान भारत) के तहत गरीब मरीजों को इलाज की सेवा देना बंद कर दिया है। वजह पहले हुए इलाज पर आए खर्च का समय पर भुगतान ना होना है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हरियाणा शाखा के मुताबिक गुजरे सात अगस्त तक सरकार ने अस्पतालों को सिर्फ 245 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि अस्पतालों का कुल बकाया 500 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके पहले भी कई राज्यों में कई अस्पतालों के ऐसा ही कदम उठाने की छिटपुट खबरें आती रही हैं, मगर यह संभवतः पहला मौका है, जब किसी राज्य के अस्पतालों ने सामूहिक रूप से ऐसा किया हो।
पिछले दिनों आरटीआई से हासिल एक सूचना सुर्खियों में आई थी, जिसके मुताबिक इस वर्ष फरवरी तक देश भर में अस्पतालों के 1.12 लाख करोड़ रुपये सरकार पर बकाया थे। लगभग 64 लाख मामलों का निपटारा तब तक नहीं हुआ था। इस योजना का लाभ देने के लिए 32 हजार अस्पतालों को सरकारी सूची में शामिल किया गया है। 2011 के सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना के आधार पर वंचित श्रेणी में रखे गए लोगों को इस योजना का लाभ मिलता है। ऐसे 41 करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिए गए हैं। योजना के तहत उनके इलाज पर आए पांच लाख रुपये तक के खर्च का भुगतान सरकार करती है।
2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खूब शोर-शराबे के साथ इस योजना का एलान किया था। तब इसे “मोदी केयर” योजना के रूप में भी प्रचारित किया गया। जरूरतमंद तबकों को प्रत्यक्ष लाभ देने की मोदी सरकार के नजरिए के तहत इसे सर्व-प्रमुख योजनाओं में गिना जाता है। मगर असल में इसके अमल का हाल क्या है, उसकी मिसाल उपरोक्त घटनाक्रम है। वैसे तो बीमा आधारित चिकित्सा व्यवस्था अपने-आप में समस्याग्रस्त है, क्योंकि इनके तहत ओपीडी सुविधाएं नहीं मिलतीं, जबकि सबसे ज्यादा जरूरत उनकी ही पड़ती है। बहरहाल, जो योजनाएं हैं, अगर उन पर भी कारगर अमल नहीं होता, तो उससे समस्या और गहरा जाती है। फिलहाल ऐसा ही विभिन्न राज्यों में हो रहा है।
