अमेरिका में जितना तीखा ध्रुवीकरण है, उसके बीच कांग्रेस संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने का नतीजा राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आने और उस पर कार्रवाई आगे बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।
अमेरिका में आज हो रहे मिडटर्म चुनावों पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इनसे उभरने वाले जनादेश का तुरंत विश्व-व्यापी प्रभाव देखने को मिल सकता है। पहला, असर ईरान युद्ध पर संभव है। चर्चाएं गर्म हैं कि डॉनल्ड ट्रंप ने इजराइल के साथ मिल कर ईरान पर जोरदार हमला बोलने की तैयारी कर ली है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुमान सही हुए, और ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी हारी, तो उससे बनने वाले सियासी नैरेटिव को पृष्ठभूमि में डालने का यह कारगर तरीका हो सकता है। रिपब्लिकन पार्टी की कमजोर स्थिति का प्रमुख कारण ईरान युद्ध से उपजे महंगाई और डीजल के अभाव जैसे संकट हैं। इसलिए ट्रंप बदले की भावना से भी ईरान पर अधिक विनाशकारी हमलों का निर्णय ले सकते हैं।
यह कदम इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी रास आएगा, जो पिछले हफ्ते के चुनाव में बहुमत गंवा चुके हैं और जोड़तोड़ से फिर सरकार बनाने की कोशिश में जुटे हैँ। नया आक्रमण हुआ, तो ईरान ने धमकी दे रखी है कि इस बार वह बेलगाम निशाना साधेगा, जिसके शिकार ऊर्जा ढांचे, जल-शोधन संयंत्र और नागरिक ठिकाने बनेंगे। ऐसा हुआ, तो पहले से संकटग्रस्त विश्व अर्थव्यवस्था के सामने अभूतपूर्व चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। रिपब्लिकन पार्टी की संभावित हार का अमेरिका की अंदरूनी राजनीति पर बेहद गहरा असर होने की संभावना है।
अमेरिका में जिस तरह सियासी और सामाजिक ध्रुवीकरण तीखा हुआ है, उसके बीच कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने का मतलब राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आने और उस पर कार्रवाई आगे बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। सामान्यतः ऐसे हालात में पदासीन राष्ट्रपति पंगु अवस्था में पहुंच जाते हैं। लेकिन ट्रंप सामान्य राष्ट्रपति नहीं हैं। ऐसे में संभावना है कि वे कार्यकारी अधिकारों के उपयोग करते हुए शासन चलाने की तरफ बढ़ेंगे, जिससे देश में राजनीतिक विभाजन और तीखा हो जाएगा और संवैधानिक संस्थाएं खिंचाव एवं दबाव का शिकार होने लगेंगी। इन्हीं आशंकाओं ने अमेरिका के हितैषियों को परेशान कर रखा है और वे दम साधे बुधवार को उभरने वाले नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
