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भारत के तनावग्रस्त युवा

youth unemployment

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शिक्षा महंगी हो गई है, जबकि रोजगार के अवसर सिकुड़ते गए हैँ। इनके बीच आम परिवारों के नौजवानों को अपना भविष्य सुरक्षित नजर नहीं आता। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक जेन-जी और मिलेनियम पीढ़ी के युवा सोशल मीडिया के जरिए दुनिया से ज्यादा जुड़े हैं।

भारत का युवा वर्ग तनावग्रस्त है। यह बात फिर एक सर्वेक्षण से सामने आई है। बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के अध्ययन से जाहिर हुआ कि जेन-जी और मिलेनियल पीढ़ियों के भारतीय नौजवान अपनी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले ज्यादा तनावग्रस्त हैं। स्टडी के मुताबिक करीब 77 फीसदी लोगों में तनाव का कम-से-कम एक लक्षण दिखा। इसके मुताबिक वैसे तो हर तीन में से एक भारतीय तनाव और घबराहट से जूझ रहा है, लेकिन अपेक्षाकृत खासकर मिलेनियल और जेन पीढ़ियों (1994 से 2009 के बीच पैदा हुए व्यक्ति) के युवाओं के तनाव, घबराहट और क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित होने की आशंका ज्यादा पाई गई। सर्वे के दौरान युवाओं ने बताया कि उनकी पीढ़ी शिक्षा से लेकर अपने करियर की शुरुआती अवस्थाओं तक के सफर को खासा मुश्किल मान रही हैं। उनके इस अहसास की पुष्टि उन अध्ययनों से भी हुई है, जिनसे कार्यस्थल पर सेहत में गिरावट के संकेत मिलते हैं।

खासकर महिलाओं और जेन-जी के कर्मचारियों में ऐसी शिकायतें अधिक देखने को मिली हैं। अलीगढ़ स्थित क्रेया यूनिवर्सिटी में सेपियन लैब्स सेंटर फॉर द् ह्यूमन ब्रेन एंड माइंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक आय के विभिन्न स्तरों वाले 18 से 24 साल के करीब 51 फीसदी भारतीय युवा तनावग्रस्त पाए गए। यह विचारणीय है कि ऐसी हालत क्यों है? बेशक इसकी एक वजह पारिवारिक अति-अपेक्षाएं हो सकती हैं। लेकिन बड़ा कारण शिक्षा एवं रोजगार की बिगड़ती स्थितियां हैं। शिक्षा लगातार महंगी हो गई है, जबकि रोजगार के अवसर सिकुड़ते गए हैँ। इनके बीच आम परिवारों के नौजवानों को अपना भविष्य सुरक्षित नजर नहीं आता। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक जेन-जी और मिलेनियम पीढ़ी के युवा सोशल मीडिया के जरिए दुनिया से ज्यादा जुड़े हैं। इससे देश-दुनिया में बनते हालात से वे बेहतर ढंग से परिचित हैँ। सामाजिक-राजनीतिक तनाव उन्हें अधिक प्रभावित करता है। अलग-अलग देशों में युद्ध और कई प्रकार की बढ़ती अनिश्चितताओं ने नौजवान पीढ़ी में तनाव को बढ़ा दिया है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि युवा वर्ग की चिंताओं को समझने और उसका समाधान ढूंढने की गंभीर कोशिश की जाए। वरना, भारत अपनी युवा जनसंख्या के कारण मौजूद अवसर का लाभ उठाने से चूक जाएगा।

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