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मजबूत संदेश के साथ

New Delhi, Jan 27 (ANI): Prime Minister Narendra Modi, with President of the European Council António Luís Santos da Costa, and President of the European Commission Ursula von der Leyen, at Hyderabad House, in New Delhi on Tuesday. (DPR PMO/ANI Photo)

डॉनल्ड ट्रंप के मूड के हिसाब से कभी बंद, तो कभी खुलते अमेरिकी बाजार के दरवाजों से परेशानी के दौर में भारत और ईयू ने उस वार्ता को अंजाम तक पहुंचाया है, जो 19 वर्षों से खिंच रही थी।

डॉनल्ड ट्रंप के प्रहार झेल रही दुनिया में भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करके मजबूत संदेश दिया है। ट्रंप के मूड के हिसाब से कभी बंद, तो कभी खुलते अमेरिकी बाजार के दरवाजों से परेशानी के दौर में दोनों पक्षों ने उस वार्ता को अंजाम तक पहुंचाया है, जो 19 वर्षों से खिंच रही थी। इसके बावजूद एफटीए के लागू होने में अभी कम-से-कम एक वर्ष लगेगा। इसके तहत मिलने वाली रियायतों के संपूर्णतः लागू होने में तो सात साल लगेंगे। ईयू में ऐसे समझौतों पर मुहर लगने की प्रक्रिया दुरूह है। मसलन, अब समझौते के प्रारूप का वहां प्रचलित 24 भाषाओं में अनुवाद होगा। संबंधित देशों की हरी झंडी मिलने के बाद यूरोपीय संसद उसे पारित करेगी।

उस प्रक्रिया से होकर निकले प्रारूप पर तब जाकर दस्तखत हो पाएंगे। चूंकि विवादास्पद मुद्दों को फिलहाल एफटीए से अलग रखा गया है, इसलिए संभावना है कि उपरोक्त प्रक्रियाएं निर्बाध पूरी हो जाएंगी। कृषि, निवेश संरक्षण, कार्बन टैक्स आदि फिलहाल एफटीए में शामिल नहीं हैं। पिछले वित्त वर्ष में भारत और ईयू के बीच व्यापार 136.5 बिलियन डॉलर का था। एफटीए लागू होने के बाद इसमें 41- 65 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। अमेरिका के लगाए टैरिफ से भारत के जीडीपी को 1.6 फीसदी नुकसान का अंदाजा लगाया गया था। संभावना है कि उसमें से लगभग आधे की भरपाई ईयू से बढ़ने वाले व्यापार से हो जाएगी। इससे ईयू के वस्त्र बाजार में भारतीय उत्पाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के उत्पादों का बाजार छीन पाएंगे।

मगर महंगे वाहनों, नासपाती, कीवी, स्टील, फूड प्रोसेसिंग आदि के भारतीय कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा। बहरहाल, बदलती हुई दुनिया में निर्यात केंद्रित अर्थव्यवस्थाएं ऐसे ही उपायों से अपनी मुश्किलों से निकलने की जद्दोजहद कर रही हैं। पिछले हफ्ते दावो में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आह्वान किया था कि “मध्यम श्रेणी” की ताकतें उत्पीड़न से बचने के लिए मिल-जुल कर रास्ता निकालें। उसी तरह की एक राह निकालने की कोशिश भारत-ईयू ने की है। इससे भविष्य को लेकर फिलहाल माहौल में सकारात्मकता आई है। इसमें एक मजबूत संदेश निहित है।

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