अमेजन के मॉडल पर नजर रखना जरूरी

तन्मय कुमार-  दुनिया की सबसे बड़ी ई–कॉमर्स कंपनी अमेजन के मालिक जेफ बेजोस का इस बार का भारत दौरा बड़ा फीका सा रहा है। केंद्र में नरेंद्र मोदी के पहली बार जीतने के बाद जब वे भारत आए थे तब भारत में उनका जबरदस्त स्वागत हुआ था। पर इस बार उनको बड़ा झटका लगा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा था पर उन्होंने समय नहीं दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी उनसे मुलाकात नहीं की। उलटे जब बेजोस ने भारत में लघु व मझोले उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए एक अरब डॉलर यानी करीब सात हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की तो पीयूष गोयल ने कहा कि वे यह निवेश करके भारत पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं।

वाणिज्य मंत्री ने जिस अंदाज में यह बात कही उसका समर्थन नहीं किया जा सकता है। पर उन्होंने जो बात कही है वह पूरी तरह से गलत नहीं है। सबसे पहले सरकार की नाराजगी के संदर्भ को समझना होगा। संदर्भ यह है कि जेफ बेजोस अमेरिका और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में से एक द वाशिंगटन पोस्ट के मालिक भी हैं। इस अखबार ने अनुच्छेद 370 में बदलाव से लेकर नागरिकता कानून तक के मुद्दों पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की है। इस वजह से सरकार के मंत्री नाराज थे। पार्टी के नेताओं ने तो सोशल मीडिया पर खुल कर नाराजगी जाहिर भी की। यह भी कहा जा रहा है कि चूंकि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, सीसीआई में अमेजन का एक मामला चल रहा है इसलिए प्रधानमंत्री और दूसरे मंत्री उनसे नहीं  मिले। पर यह कारण पूरी तरह से सही नहीं है।

असल में वाशिंगटन पोस्ट की आलोचना की वजह से ही बेजोस को ठंडा स्वागत हुआ और वाणिज्य मंत्री ने बहुत तल्खी से कहा कि सात हजार करोड़ रुपए का निवेश करके वे भारत पर कई अहसान नहीं कर रहे हैं। हालांकि इसके एक दिन बाद उन्होंने कहा कि नियम के तहत जो भी निवेश आएगा भारत उसका स्वागत करेगा। अगर भारत सरकार के मंत्री यह मानते हैं कि वाशिंगटन पोस्ट का संपादक अपने मालिक की सलाह से अखबार चलाता है तो उन्हें सबसे पहले अपना यह विचार बदलना होगा। पर इस मामले का जो दूसरा पहलू है उस पर ज्यादा गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

दूसरा पहलू अमेजन या फ्लिपकार्ट या दूसरी ई-कॉमर्स वेबसाइट के बिजनेस मॉडल का है। इनका बिजनेस मॉडल भारत के पारंपरिक किराना या रिटेल कारोबार को खत्म कर रहा है। कहा जा सकता है कि इस खुदरा कारोबार से जुड़ा समूह भाजपा का समर्थक है इसलिए दिल्ली के चुनाव से ठीक पहले भाजपा के नेताओं और केंद्र सरकार के मंत्रियों ने उसे केंद्र में रख कर अमेजन को मालिक को हड़काया। हो सकता है कि कुछ हद तक इस मामले में सचाई हो। ध्यान रहे दिल्ली में अगले मतदान है। दिल्ली में पंजाबी और वैश्य ही भाजपा का वोट आधार रहा है। सो, खुदरा कारोबारियों के हितों की बात करके भाजपा और केंद्र सरकार के मंत्रियों ने अपने वोट बैंक को साधने का प्रयास किया है।

पर असलियत यह भी है कि ई-कॉमर्स की कंपनियों ने भारत में खुदरा कारोबार के लिए संकट पैदा किया है और उसके साथ ही रोजगार का भी संकट पैदा किया है। जेफ बेजोस दस लाख नई नौकरियों की बात कर रहे हैं पर भारत के खुदरा कारोबार में करोड़ों की संख्या में लोग शामिल हैं। एक मोटे अनुमान के मुताबिक भारत मेंकरीब डेढ़ करोड़ खुदरा दुकानें हैं, जिनमें एक से तीन आदमी काम करते हैं। यानी एक से तीन परिवार इस काम में जुटे हैं। यह कम निवेश और अधिक रिटर्न का मॉडल है क्योंकि यह पड़ोसी की दुकान की तरह होती है। इसमें कारोबारी अपने सीमित स्पेस में अधिकतम चीजें भर कर रखता है और कम पूंजी निवेश के रोटेशन से ज्यादा कमाई करता है। इसके मुकाबले संगठित खुदरा कारोबार में उतरी कंपनियों और ई-कॉमर्स कंपनियों का मॉडल बहुत खर्च वाला है।

ई-कॉमर्स की कंपनियां और खुदरा दुकानों की शृंखला चला रहीं कंपनियां प्रचार पर बड़ा खर्च करती हैं और बड़ी छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। इसमें उन्हें बड़ा नुकसान हो रहा है। पर नई फंडिंग और नए निवेश के जरिए वे अपनी कंपनियों को चला रहे हैं। अंततः यह मॉडल तभी कामयाब होगा, जब इनका एकाधिकार बनेगा। जैसे संचार कंपनियों ने कीमत की होड़ में सस्ती सेवाएं दीं और अंततः दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गईं। पर चूंकि उन्होंने एकाधिकार बना लिया है इसलिए वे मनमाने तरीके से शुल्क बढ़ाने लगे हैं। ई-कॉमर्स और रिटेल चेन की दुकानों के साथ भी अंततः यहीं होना है। जब वे देश के खुदरा कारोबार को खत्म कर देंगे और एकाधिकार बना लेंगे तो सारी छूट भी खत्म हो जाएगी। फिर उनके  तय किए दाम पर ग्राहकों को सामान खरीदना होगा।

यह मॉडल देश के खुदरा कारोबारियों के लिए तो नुकसानदेह है ही रोजगार की संभावना और आम ग्राहक के लिए भी अच्छा नहीं है। तभी अगर सरकार अपनी  तात्कालिक नाराजगी में प्रतिक्रिया देने की बजाय दीर्घावधि में इससे होने वाले नुकसान का आकलन करे और उस हिसाब से नीतिगत फैसला करे तो ज्यादा बेहतर होगा। सरकार को इस हिसाब से फैसला करना होगा कि निवेश भी प्रभावित नहीं हो और खुदरा कारोबार भी बचे।

One thought on “अमेजन के मॉडल पर नजर रखना जरूरी

  1. But Indian retails wants huge profit, they dont want to lower their profit. That is the reason indian consumer is in love with on line retailers.
    Indian medicine shops who earn profit in some medicines even up to 50% dont give any discount , naturally online retailers give discount of 10- 20 % is appreciated by the consumer.

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