लेख स्तम्भ | आज का लेख

असली मुद्दों पर चर्चा कहां है!

तन्मय कुमार– क्या सचमुच केंद्र सरकार अखबार की सुर्खियों का प्रबंधन करके चल रही है? बहुत पहले मशहूर पत्रकार अरुण शौरी ने यह बात कही थी। अब सचमुच ऐसा लग रहा है कि सरकार का पहला काम सुर्खियों का प्रबंधन करना है। उसका सारा जोर इस बात पर है कि सरकार के कामकाज को लेकर निगेटिव खबरें सामने नहीं आएं और अगर आए भी तो खबर ऐसी हो जो उसको राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचाए। जैसे जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रों के प्रदर्शन, आगजनी और पुलिस के लाठीचार्ज की खबरें हैं। भाजपा और सरकार के प्रबंधकों को लग रहा है कि ये निगेटिव खबरें सरकार की हिंदुवादी छवि को मजबूत करती हैं और इसका कहीं न कहीं राजनीतिक फायदा मिलेगा। पहला फायदा झारखंड के चुनाव में ही मिलने की उम्मीद है।

बहरहाल, जब सरकार ने नागरिकता कानून नहीं पास कराया था और इस मुद्दे पर देश भर में हंगामा नहीं शुरू हआ था तो सबसे बड़ा मुद्दा क्या था? तब सबसे बड़ा मुद्दा देश की आर्थिक स्थिति थी। भारतीय रिजर्व बैंक का यह अनुमान था कि देश का सकल घरेलू उत्पादन यानी जीडीपी पांच फीसदी रहेगी। चालू वित्त वर्ष के लिए आरबीआई का संशोधित अनुमान पहले 6.1 फीसदी था, जिसे उसने घटा कर पांच फीसदी कर दिया है। पर इस बात के ऊपर चर्चा नहीं हो रही है। अब कहीं भी यह मुद्दा नहीं है। किसी लोकप्रिय विमर्श में आर्थिकी नहीं है। सब इस बात को लेकर आंदोलित हैं कि सरकार विभाजनकारी एजेंडा चला रही है और छात्रों पर लाठी चलवा रही है। सोचें, यह कितना बड़ा डाइवर्जन है। यह अनजाने में हुआ या जान बूझकर किया गया, यह अलग चर्चा का विषय है।

सोचें, पिछले दिनों रिजर्व बैंक ने महंगाई दर साढ़े पांच फीसदी से ऊपर जाने का आंकड़ा जारी किया। उसके मुताबिक खाने पीने की चीजों की महंगाई दस फीसदी से ऊपर चली गई है। जिस समय यह आंकड़ा आया उस समय दिल्ली में प्याज की कीमत 125 रुपए किलो थी और दक्षिण के कम से कम एक राज्य से खबर थी कि प्याज ढाई सौ रुपए किलो बिकी है। जिस दिन रिजर्व बैंक ने महंगाई का आंकड़ा दिया उसी दिन मदर डेयरी और अमूल ने दूध की कीमत तीन रुपए प्रति किलो तक बढ़ा दी। पेट्रोल के दाम इस साल में पहली बार 75 रुपए प्रति लीटर से ऊपर गए हैं। पर क्या कहीं भी प्याज, पेट्रोल या दूध की चर्चा है?

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ‘स्टैगफ्लेशन’ की चर्चा की। उन्होंने कहा कि ग्रोथ स्टैगनेंट हो गई या यानी थम गई है और इन्फ्लेशन बढ़ गई है। स्टैगनेशन और इन्फ्लेशन को मिला कर उन्होंने स्टैगफ्लेशन कहा। इसका सीधा मतलब है कि लोगों की आमदनी कम हो गई है और खर्च बढ़ गए हैं। यह स्थिति किसी भी देश और समाज के लिए बेहद चिंताजनक है। तभी नरेंद्र मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रह्मण्यम ने ‘ग्रेट स्लोडाउन’ भयंकर आर्थिक मंदी की बात कही। पर कहीं भी ऐसा लग रहा है कि सरकार के वित्तीय प्रबंधकों को इस बात की चिंता हो रही है? रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और मशहूर अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने सरकार से कहा कि वह किसी तरह से आम लोगों तक पैसे पहुंचाए और खर्च करने के लिए प्रेरित करे। पर इसके बदले में सरकार कारपोरेट टैक्स में कमी कर रही है और आय कर की दरों में बदलाव कर विचार कर रही है। यानी या तो सरकार प्रयास करके लोगों का ध्यान भटका दे रही है या सुधार के नाम पर गलत दिशा में बढ़ जा रही है।

बहरहाल, जब नागरिकता कानून नहीं पास हुआ था और संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ था तो खराब आर्थिकी के साथ साथ दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा क्या था? दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा इलेक्टोरल बांड का था। भाजपा और केंद्र सरकार दोनों इस मामले में बुरी तरह से फंसे थे। सीधे प्रधानमंत्री पर आरोप लगा था कि उन्होंने दबाव डाल कर बांड की विशेष बिक्री की विंडो खुलवाई थी और सरकार के दबाव में समय बीत जाने के बाद बांड को भुनाया गया था। यह भी खबर आई थी कि भाजपा को ऐसी कंपनी से चंदा मिला है, जिसका अतीत अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के करीबी इकबाल मिर्ची की कंपनी से जुड़ा हुआ है। इलेक्टोरल बांड से जुड़ी कई बातों का सरकार और भाजपा को जवाब देना था। पर अब कोई सवाल ही नहीं पूछ रहा है। इलेक्टोरल बांड का मुद्दा सुर्खियों से बाहर हो गया।

अरविंद सुब्रह्मण्यम ने जिस टीबीएस यानी टू बैलेंस शीट की बात कही है उसमें उन्होंने दूसरी बैलेंस शीट नोटबंदी के बाद की बनाई है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद बैंकों के पास पैसा आया, जो उन्होंने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को दिया और उसमें से ज्यादातर पैसा डूब गया। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले बैंकिंग के इस फ्रॉड की भी चर्चा शुरू हुई थी। पंजाब नेशनल बैंक के विदेशी ऑडिटर ने बताया था कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने बैंक को 14 हजार नहीं, बल्कि 28 हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया है। यह भी खबर आई कि देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने अपने 12 हजार करोड़ रुपए के एनपीए की सूचना नहीं दी।

संसद सत्र के पहले हफ्ते में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद सदन को बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में यानी एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 95 हजार करोड़ रुपए का बैंकिंग फ्रॉड हुआ है। इस किस्म के तमाम बैंकिंग फ्रॉड में आम आदमी का रुपया डूबा है। पर इस बारे में किसी राजनीतिक दल को चर्चा करने की फुरसत नहीं है क्योंकि सरकार ने उनको नागरिकता कानून के विवाद में उलझा दिया है। यह तय माने की इस तरह उलझाने वाले मुद्दों की कमी नहीं होने दी जाएगी। यह पार्टियों और सिविल सोसायटी को तय करना है कि वे जनता से जुड़े असली मुद्दे उठाते हैं या सरकार के बहकावे में आकर उसको फायदा पहुंचाने वाले एजेंडे पर राजनीति करते हैं?

Latest News

PM Modi Meeting On jammu kashmir : PM Modi के बुलावे पर पहुंचने लगे कश्मीर के नेता, बैठक का काउंटडाउन शुरू
आज खास | NI Editorial - June 24,2021
नई दिल्ली | PM Modi Meeting On jammu kashmir: प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आज होने वाली बैठक पर देश भर के…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा पोस्ट | देश | लाइफ स्टाइल | यूथ करियर

SC on 12Th Board : SC ने 12वीं की परीक्षा के लिए अड़ी आंध्र प्रदेश की सराकर से कहा- यदि एक भी बच्चे को कुछ हुआ तो फिर…

SC on 12Th Board

नई दिल्ली | SC on 12Th Board:  देश के ज्यादातर राज्यों में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बोर्ड ओर CBSE को यह निर्देश भी दिया है कि आने वाले 10 दिनों में परिणामों की घोषणा कर दी जाए. लेकिन अभी भी आंध्र प्रदेश अपनी परीक्षाओं को आयोजित करने को लेकर अड़ा हुआ है. अब आंध्र प्रदेश की जीत के आगे सुप्रीम कोर्ट में सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर राज्य के एक भी बच्चे को कुछ भी हुआ तो उसकी सारी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. इसका खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहें. उसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने आंध्र प्रदेश की सरकार को किसी भी बच्चे के कोरोना संक्रमित होने और उसकी मौत पर एक करोड़ का मुआवजा तक चुकाने की बात कह डाली.

10 दिन के अंदर 31 जुलाई तक जारी करें परिणाम

SC on 12Th Board: सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की सरकार को यह साफ कर दिया कि जब तक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती तब तक राज्यों में 12वीं बोर्ड की परीक्षा के लिए अनुमति नहीं देगा. इधर 12वीं के परिणामों में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई की तर्ज पर राज्य सरकार को बोर्ड के परिणामों की घोषणा करनी चाहिए. सभी स्टेट बोर्ड के ढीले रवैए पर एतराज जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 10 दिनों के अंदर 31 जुलाई तक नतीजों की घोषणा कर दें.

इसे भी पढ़ें – जो भी नागरिक वैक्सीन नहीं लगवाएगा वह भारत जा सकता है- फिलीपिंस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते की धमकी

SC on 12Th Board

कोर्ट ने पूछा आंध्र सरकार से यह सवाल

Justice m khanwilkar और Dinesh Maheshwari की पीठ ने आंध्र प्रदेश की सरकार से यह जानने का प्रयास किया कि वह आखिर फिजिकल परीक्षा क्यों लेना चाहता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब देश में कोरोना का नया खतरनाक वैरीअंट चल रहा है तो फिर बच्चों की जिंदगी से रिस्क क्यों लेना है. कोर्ट में आंध्र प्रदेश की सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि परीक्षा के आयोजन से एक भी बच्चे की मौत होती है तो वह राज्य सरकार को एक करोड़ के मुआवजे का आदेश देगी.

इसे भी पढ़ें- अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के एकाउंट से 18 लाख 55 हजार का हुआ था ‘कॉल गर्ल’ को भुगतान, जानें क्या है मामला

Latest News

aaPM Modi Meeting On jammu kashmir : PM Modi के बुलावे पर पहुंचने लगे कश्मीर के नेता, बैठक का काउंटडाउन शुरू
नई दिल्ली | PM Modi Meeting On jammu kashmir: प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आज होने वाली बैठक पर देश भर के…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *