दूरदर्शिता से सौहार्द की विजय

कैलाश विजयवर्गीय

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक फैसले के बाद देश के लोग बहुत प्रसन्न हैं। दो-चार औवेसियों को छोड़कर सबने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। मुस्लिम पक्ष ने भी निर्णय का सम्मान किया है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारुखी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए रिव्यू न करने का ऐलान किया है। सुन्नी बोर्ड ने पहले ही कह दिया था कि अदालती फैसला माना जाएगा। लंबे समय से विवाद के विषय पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश में शांति बनी रही और लोगों ने अपने-अपने तरीके से प्रसन्नता जाहिर की। देश के किसी भी कोने से हिंसा या तनाव व्याप्त आने की कोई खबर नहीं है। मुस्लिम बहुल इलाकों में भी लोगों ने खुशी जताते हुए फैसले का स्वागत किया।

सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों ने 40 दिन 200 घंटे सभी पक्षों के दावे सुनकर सर्वसम्मति से देश में सौहार्द लाने वाला ऐतिहासिक फैसला सुनाया। फैसले के पहले केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों ने हिन्दू और मुस्लिम नेताओं से बातचीत कर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानने और हार-जीत का सवाल न बनाने का माहौल बनाया। सर संघचालक मोहन भागवत ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की थी।

मुस्लिम धार्मिक नेताओं से संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपालजी, इन्द्रेशजी, भाजपा के पूर्व महामंत्री संगठन रामलालजी, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार नकवी और भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बातचीत की। मुस्लिम नेताओं ने संघ की पहल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानने के बयान दिए। विश्व हिन्दू परिषद ने सौहार्द बनाने के लिए बयान दिए। अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने के फैसले को मान लिया गया। कुछ तथाकथित कम्युनिस्टों के फैसले की आलोचना करने और जेएनयू में नारेबाजी के करने के अलावा हर जगह फैसले की प्रशंसा की गई।

हर जगह शांति बनी रही। यह सब अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की किसी कार्य को पूर्ण कराने में लगन, दृढ़ता, परिश्रम और दूरदर्शिता का परिचय मिलता है। जिस तरह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और राज्य के विभाजन से पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, उसी तरह अयोध्या के फैसले को लेकर देश में माहौल बनाया गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन किया जाएगा। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने सभी से शांति की अपील की।

देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखन के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सभी राज्यों को एडवाइजरी भेजी गई थी। राज्य सरकारों ने फैसला आने से पहले शांति व्यवस्था बनाए रखने की पूरी तैयारी की थी। सरकारी कर्मचारियों,सुरक्षा बलों और पुलिस कर्मचारियों के अवकाश रद्द कर दिए गए। छुट्टी पर जाने वालों कर्मचारियों को काम पर बुला लिया गया। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ही विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की एडवाइजरी का पूरा ध्यान रखा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारियों को लेकर बातचीत की। उनका इस बात पर जोर था कि शांति और सौहार्द का माहौल न बिगड़े। अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी बातचीत की। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही इस दिशा में कदम उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या आएगा,उससे पहले ही सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और फैसले का पालन करने की दिशा में कार्य किया गया। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए राज्य सरकारों को सतर्क किया। यह एक बड़ी उपलब्धि है कि अयोध्या में श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर बनाने को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद हिन्दू पक्ष ने खुशी जताई पर साथ ही शांति व्यवस्था न बिगड़े, इसका पूरा ध्यान रखा। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सुरक्षा और शांति बनाए रखने के प्रयासों को लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों ने खुशी जताई।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करना एक कठिन कार्य था। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने जिस तरह दृढ़ता के साथ यह कार्य कर दिखाया, उसे लेकर देश में उनकी एक अलग छवि बनी है। अनुच्छेद 370 समाप्त करने के साथ ही कश्मीर घाटी में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना आसान नहीं था। अमरनाथ यात्रा को रोककर तमाम आशंकांओं के बीच यात्रियों को कश्मीर से बाहर भेजा गया। सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। किसी को खबर नहीं थी कि क्या होने वाला है। संसद में जब प्रस्ताव पारित हुआ तो लोगों को पता चला कि जम्मू-कश्मीर में आजादी के बाद जारी लोगों से भेदभाव समाप्त कर दिया गया। पाकिस्तान की अमन-चैन बिगाड़ने की तमाम कोशिशों को जवाब दिया गया। इसी तरह अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश में एक और नई शुरुआत हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश तो बधाई के पात्र हैं ही साथ प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने जिस दृढ़ता से साथ अदालत के फैसले को पालन कराने की दिशा में कदम उठाया उससे यह माना जा रहा है कि भारत में अशांति फैलाने वालों को भी जनता सही जबाव देगी। सम्प्रदाय और मजहब का राजनीति में दखल कम होगा। कुछ राजनीतिक दलों के लोग कह रहे हैं कि 370 समाप्त करने और अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने के बाद भाजपा किस बात पर राजनीति करेगी। भाजपा ने मंदिर मुद्दे पर कभी कोई राजनीति नहीं की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेशमंत्री एस जयशंकर ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलाने की कसक अभी बाकी है।

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