संगठन चुनाव के सहारे युवा नेतृत्व उभारेगी भाजपा

दरअसल किसी भी राजनीतिक दल का मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता दिलाने में सहयोगी होता है और आजकल जिस तरह से चुनाव में धनबल और बाहुबल का उपयोग होने लगा है ऐसे में संगठन में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर जब पूरी दुनिया में युवा आबादी तेजी से बढ़ रही है तब राजनीतिक दलों में भी युवा नेतृत्व उभारने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

बहरहाल पूरे देश में मध्यप्रदेश का भाजपा संगठन कुछ वर्षों पहले तक सबसे मजबूत माना जाता था लेकिन कुशाभाऊ ठाकरे और प्यारेलाल खंडेलवाल जैसे संगठन शिल्पिओं के चले जाने के बाद धीरे-धीरे संगठन कमजोर होता गया।

खासकर पिछले 15 वर्षों में प्रदेश में भाजपा की सरकार के रहते संगठन अनेक बार सत्ता के आगे कमजोर दिखाई दिया। कुछ प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री ऐसे बदल गए कि लगता ही नहीं था कि यह भाजपा के पदाधिकारी हैं। यही कारण है कि पार्टी को प्रदेश में उस समय सत्ता गंवानी पड़ी जब पूरे देश में भाजपा का जोर चल रहा है और पार्टी सबक सीखने के बजाय संगठन चुनाव में चुनाव कराने का नाटक कर रही है।

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कोई भी स्पष्ट दिशानिर्देश चुनाव अधिकारियों को नहीं दिए गए हैं। मंडल अध्यक्षों की उम्र को लेकर भी अलग-अलग राय है। कहीं 35 वर्ष तक तो कहीं 40 वर्ष तक के तो कहीं-कहीं 45 बरस की उम्र तक के मंडल अध्यक्ष चुने जाने की चुनाव अधिकारी बात कर रहे हैं लेकिन इतना तय है कि पहले की बजाए अपेक्षाकृत युवा मंडल अध्यक्ष चुने जाएंगे। कई जगह तो चुनाव की केवल औपचारिकता होना है। जब पार्टी ने संगठन चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था तब चुनावी कार्यक्रम के साथ-साथ चुनाव में भाग लेने के लिए फार्म भी भेजे थे लेकिन अब कहा जा रहा है कि फार्म नहीं भरवाना है केवल आम राय से सहमति बनाना है।

इसी तरह पहले कहा जा रहा था कि विधायकों और सांसदों को संगठन चुनाव से दूर रखना है लेकिन किसी भी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंडलों के चुनाव बगैर भाजपा विधायक की सहमति के संभव ही नहीं है और जहां भाजपा के विधायक नहीं हैं वहां सांसद की सहमति महत्वपूर्ण रहेगी। एक तरह से चुनाव कराना भी है और करना भी नहीं है। जैसा पहले कभी पार्टी कांग्रेस पार्टी के चुनाव पर मजाक करती थी लगभग वैसी स्थिति में पार्टी में मंडल स्तर की चुनाव प्रक्रिया आज और कल में पूरी हो जाएगी।

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कुल मिलाकर प्रदेश में 1013 मंडलों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यों सहित 61 पदाधिकारियों और सदस्यों का चुनाव भाजपा कर लेगी और लगभग 6000 से भी ज्यादा युवा नेतृत्व पूरे प्रदेश में पार्टी उभारेगी और यदि इसी पैटर्न को आगे बढ़ाया गया तो जिला और प्रदेश स्तर पर भी युवा नेतृत्व के हाथों में बागडोर पहुंचेगी।

इससे पार्टी को युवा ऊर्जावान नेतृत्व तो मिल जाएगा लेकिन पार्टी के वे वरिष्ठ नेता जिन्हें विधानसभा या लोकसभा में टिकट नहीं मिल पाता है वे संगठन में पद पाने की ख्वाहिश लिए रहते हैं वे अब कहां जाएंगे और पार्टी उनको कैसे संतुष्ट करेगी। जब तक होश और जोश का समन्वय नहीं होगा तब तक पार्टी का आदर्श और मजबूत माना जाने वाला प्रदेश पूरे देश के संगठन में अपना गौरवशाली इतिहास द्वारा पाएगा।

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