सदस्यता को लेकर सदन से पहले सड़क पर संघर्ष

दरअसल दोनों ही दलों को वर्षों बाद विधायकों की अहमियत पता चली है। पिछले 15

वर्षों में भाजपा के पास डेढ़ सौ से ऊपर विधायक हुआ करते थे

और इसके बावजूद भाजपा उपचुनाव जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दी थी

और कांग्रेसी विधायकों को तोड़कर भाजपा में शामिल कराती थी।

संजय पाठक और नारायण त्रिपाठी को जब कांग्रेस से भाजपा में लाया गया तब भाजपा

के पास बहुमत का कोई संकट नहीं था।

अब जबकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है

तो वह भाजपा सरकार से बदला लेना चाहती है और बहुमत को सुरक्षित संख्या तक पहुंचाने का उपाय भी कर रही है।

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अब भाजपा अपने विधायकों को बचाने के लिए बेचैन है।

दोनों दलों की इस खींचतान में विधायकों की बल्ले-बल्ले है।

दोनों तरफ से पूछ-परख बढ़ी हुई है और एक-एक विधायक को अपने पक्ष में करने के लिए दोनों ही दल पूरी ताकत से लगे हुए हैं।

बहरहाल पवई विधायक प्रहलाद लोधी को भोपाल की जिला न्यायालय द्वारा

2 साल की सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा

प्रजापति ने तत्परता दिखाते हुए लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी।

विधायक प्रहलाद लोधी सजा पर हाईकोर्ट से स्टे ले आए तब से भाजपा लोधी की सदस्यता को बहाल किए जाने की मांग कर रही है।

इसी मांग को लेकर बुधवार को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

और नरोत्तम मिश्रा राज्यपाल लालजी टंडन से मिले और उन्हें ज्ञापन देकर लोधी की सदस्यता बहाल किए जाने का अनुरोध किया।

राज्यपाल ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

भाजपा नेता लोधी को शीतकालीन सत्र में विधानसभा के अंदर ले जाने के लिए आमादा है।

ऐसे में यदि राज्यपाल ने कोई रियायत नहीं दी तब शीतकालीन सत्र में हंगामा होना तय माना जा रहा है।

उधर सत्ताधारी दल कांग्रेस लोधी की सजा पर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए स्टे के खिलाफ उच्च न्यायालय में चुनौती देगी।

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महाधिवक्ता शशांक शेखर का कहना है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट से लोधी को मिले स्टे को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी।

एक-दो दिन में विशेष अनुमति याचिका दायर करेंगे

और उच्च न्यायालय के निर्णय को कई आधार पर चुनौती दी जाएगी।

कुल मिलाकर प्रहलाद लोधी की सदस्यता को लेकर दोनों ही दल आमने-सामने हैं

और शीतकालीन सत्र में सदन में होने वाले संघर्ष के पहले सड़क पर संघर्ष शुरू हो गया है।

भाजपा ने जहां राज्यपाल से सदस्यता बहाल करने की गुहार लगाई है

वहीं कांग्रेस उच्चतम न्यायालय में लोधी को हाईकोर्ट से सजा में मिले स्टे को चुनौती देगी और यदि सदस्यता बहाल नहीं हुई

तो फिर भाजपा जिस तरह से लोधी को सदन में ले जाने की बात कह रही है कांग्रेस भी रोकने की पूरी कोशिश करेगी।

दोनों ही दलों के बीच प्रहलाद लोधी की सदस्यता के साथ-साथ सदन की कार्य अवधि को लेकर भी पत्रवार शुरू हो गया है।

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सदन की अवधि बढ़ाए जाने की मांग को लेकर पत्र लिखा था

जिसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह ने

गोपाल भार्गव को पत्र लिखकर भाजपा शासनकाल में विधानसभा के सीमित सत्रों की सूची भेजी,

जिसके जवाब में गोपाल भार्गव डॉक्टर गोविंद सिंह को पत्र लिखकर भाजपा शासनकाल में लंबी अवधि वाले सत्रों की सूची भेज रहे हैं

जिनका उल्लेख डॉक्टर गोविंद सिंह ने अपने पत्र में नहीं किया था।

जाहिर है दोनों ही दलों के बीच सदस्यता को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है

और शीतकालीन सत्र में हंगामा होना तय माना जा रहा है।

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