फ्रांस में उथल-पुथल

फ्रांस में अभी येलो वेस्ट प्रदर्शन खत्म नहीं हुए हैं। इन प्रदर्शनों ने हाल ही में अपनी पहली सालगिरह मनाई। इसी बीच वहां एक नए जन आंदोलन का नजारा देखने को मिला। साफ है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आर्थिक खर्च घटाने की नीतियों के खिलाफ जन विरोध बढ़ता जा रहा है। बीते हफ्ते पेंशन सुधारों के खिलाफ ट्रांसपोर्ट कर्मचारी, शिक्षक, पुलिसकर्मी और दूसरी अहम सेवाओं से जुड़े लाखों लोग हड़ताल पर चले गए। हाल के सालों में यह फ्रांस की सबसे बड़ी हड़ताल रही है, जिसके कारण पूरा देश ठप-सा हो गया। प्रदर्शन पर उतरे लोग राष्ट्रपति मैक्रों के पेंशन सुधारों का विरोध कर रहे हैं। वे इसे पक्षपाती और बेहद खर्चीला बता रहे हैं। मैक्रों सबके लिए पॉइंट आधारित एक ही पेंशन सिस्टम रखना चाहते हैं, जो हर पेंशनर के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करेगा। वे ‘यूनिवर्सल’ रिटायरमेंट सिस्टम को भी लागू करना चाहते हैं, जिसका वादा उन्होंने अपने चुनाव अभियान के दौरान किया था। लेकिन मजदूर संघों का कहना है कि प्रस्तावित सुधारों के बाद प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोगों को पूरी पेंशन हासिल करने के लिए रिटायरमेंट की कानूनी उम्र 62 साल के बाद भी काम करना होगा। इस हड़ताल को राष्ट्रपति मैक्रों के लिए एक बड़ी परीक्षा माना गया है। राजधानी पेरिस और आसपास के शहरों में इसके कारण सुरक्षा बढ़ानी पड़ी।

मजदूर संघों ने पेरिस में आगे भी बड़े प्रदर्शनों की योजना बनाई है। हड़ताल की वजह से बसें, ट्रेन और उड़ानें रद्द भी रद्द करनी पड़ी हैं। पेरिस की ज्यादातर अंडरग्राउंड ट्रेनें भी रोक दी गईं। अधिकारियों ने पर्यटकों से कहा कि वे एफिल टावर की तरफ ना जाएं। स्कूलों को भी बंद कर दिया गया, क्योंकि प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों के लगभग पांच लाख टीचर भी हड़ताल पर हैं। अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं को नाममात्र के स्टाफ के जरिए चलाया गया। मीडिया का अनुमान है कि हड़ताल कई हफ्तों तक खिंच सकती है। राष्ट्रपति पद पर दो साल पूरे कर चुके मैक्रों आने वाले महीने में कई बड़े सुधारों को लागू करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन मौजूदा हड़ताल से साफ पता चलता है कि उनकी राह आसान नहीं है। मजदूर संगठनों का कहना है कि मैक्रों इस राह पर चले तो अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया जाएगा। एक साल पहले भी फ्रांस में मैक्रों की सरकार के खिलाफ ‘येलो वेस्ट’ प्रदर्शन हुए थे, जिनमें कई बार हिंसा भी हुई। अब विरोध का एक नया दौर देखने को मिल रहा है।

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