वकील, पुलिस में कौन सेर, कौन सवा सेर?

दो नवम्बर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में एक वकील की पार्किंग को लेकर की गई धींगामुश्ती का बवाल अब पूरी दिल्ली में फ़ैल चुका है| ऐसे अनेक वीडियो सामने आए हैं जिनसे वकीलो का व्यवहार जनता को देखने को मिला है। ऐसा कई बार पहले भी हो चुका है कि पुलिस के साथ धींगामुश्ती के बाद वकील। हडताल कर देते हैं और पुलिस को बीच बचाव से काम चलाना पड़ता है।

जब वकील पुलिस का यह हाल करते हैंतो अंदाजा लगा सकते हैं कि आम आदमियों को कैसे उन के सामने भीगी बिल्ली बन कर रहना पड़ता होगा | जिस मोहल्ले में ऐसे वकील रहते होंगे ,उन मोहल्ले वालों का क्या हाल होता होगा| सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस खेहर ने तभी एक बार छोटी अदालतों के वकीलों की इसी तरह की हरकतों से तंग आ कर यहाँ तक कह चुके हैं कि सुप्रीमकोर्ट को बंद कर देना चाहिए |

वकीलों के अलावा दिल्ली पुलिस भी किसी से नहीं डरती। इसलिए बाकी तो कोई भी हो, लोगों के साथ पुलिस का व्यवहार पशुओं से बरताव जैसा होता है | पुलिस की छवि समाज के हर नागरिक का खून चूसने वाली बन चुकी है | पुलिस थाने लूट के अड्डे के रूप में इमेज बनाएहुए है। दिल्ली के कुछ थाने तो ऐसी कमाई/लूट वाले माने जाते हैं कि जितने किस्से सुने कम लगेंगे।

थानो में नियुक्तियां थानेदार भारी रिश्वत दे कर करवाते हैं|ट्रेफिक पुलिस को सडक पर खड़ा देख कर क़ानून का पालन करने वाला व्यक्ति भी रास्ता बदल लेता है | अच्छी कमाई के चक्कर में दिल्ली पुलिस के जवान मोटी रिश्वत दे कर ट्रेफिक पुलिस में डेपुटेशन पाते हैं। इस सबसे अंदाज लगा सकते हैं कि पुलिस में कितना भ्रष्टाचार फैला है| यानी हालत यह है कि वकील और पुलिस में लाठी की ताकत को ले कर सेर सवा सेर की लड़ाई है | दोनों एक दूसरे की औकात जानते हैं | लेकिन इस बार वकीलों ने सडकों पर उतर कर वीडियों फुटैज में अपने को जैसी हरकतों के साथ दिखाया है उससे आम जनता में उनकी छवि पुलिस से ज्यादा खराब बनी है| इससे आम जनता की सहानुभूति पुलिस के साथ बन गई है | इस कारण पुलिस में हिम्मत आई और वे पहली बार पुलिस वाले, उनके परिवारजन खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सडकों पर उतरे हैं |

ऐसे मौके कई बार आ चुके हैं जब वकीलों की गलती होने के बावजूद गृह मंत्रालय के दबाव में पुलिस को झुकना पड़ा है लेकिन यह पहली बार हुआ है कि पुलिस कमिश्नर के झुकने से पहले ही पुलिस कर्मी उन्हे दबाव में ले आए हैं | जितने भी वीडियों सामने आए हैं उन सभी से लगता है कि क़ानून की रक्षा करने वाले कानूनदानों ने क़ानून व्यवस्था की स्थिति पैदा की |

हालांकि न्यायिक जांच शुरू हो चुकी हैलेकिन न्यायिक जांच भी वकीलों के दबाव का शिकार हो सकती है।इस लिए सुप्रीमकोर्ट को चाहिए कि वह उन सभी वकीलों की शिनाख्त करवाए जो किसी भी तरह की हिंसा और आगजनी में शामिल थे और कार्रवाई करनी चाहिए। देश, समाज और वक्त का तकाजा है कि वकील और पुलिस तो कम से कम कानून की मर्यादा, गरिमा में व्यवहार करें।

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