पाक में अल्पसंख्यक की दशा

अजय सेतिया

अगस्त महीने में ननकाना साहिब गुरूद्वारे के ग्रन्थी की 17 साल की बेटी जगजीत कौर का अपहरण अंतर्राष्ट्रीय सुर्खी बना था। अपहरण के बाद जबरदस्ती उसका धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनाया गया और मुस्लिम युवक से निकाह करवा दिया गया। पिछली होली के समय 13 साल की रवीना और उसकी दो साल बड़ी बहन रीना का सिंध प्रांत के घोटकी जिले से अपहरण कर लिया गया। धर्मपरिवर्तन और निकाह का वही सिलसिला दोहराया गया। बाद में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन करना और निकाह करना दोनों हिन्दू बहनों का मौलिक अधिकार है। चौंकिए मत पाकिस्तान में निकाह करने की कोई आयु तय नहीं है।

इस साल जुलाई के महीने में पाकिस्तान के थत्त जिले में एक अध्यापक ने अपनी ही छात्रा पायल कुमारी का अपहरण कर लिया था। उसका भी जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कर के मुसलमान बनाया गया और अध्यापक ने अपनी नाबालिग छात्रा से जबरदस्ती निकाह कर लिया। हालांकि इस्लाम में काजी की ओर से निकाह पढने से पहले लडकी की रजामंदी लेना लाजिमी है। जगजीत, रवीना, रीना पायल उन हजारों हिन्दू लडकियों में से सिर्फ चार हैं जिनका पाकिस्तान में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवा कर निकाह करवाया जाता है। इसी तरह जब 16 सितंबर को लरकाना की बेनजीर भुट्टो मेडिकल यूनिवर्सिटी की छात्रा नम्रता का शव उसके हॉस्टल के कमरे में छत के पंखे से लटका मिला, तो उसे भी दम घुटने से मौत बता कर रफा-दफा कर दिया गया। पाकिस्तान के अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष कृष्ण शर्मा ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान का शासन प्रशासन जबरी धर्म परिवर्तन को बढावा देता है। हालांकि पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 20 धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-ऍफ़ के हिन्दू विधायक नन्द कुमार ने 2016 में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने के खिलाफ सिंध प्रांत की विधान सभा में बिल पेश किया था। बिल सदन में तो सर्व सम्मति से पास हो गया पर बाद में मुल्लाओं के दबाव में आ कर सत्ताधारी भुट्टो–जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने गवर्नर पर दबाव बनाया कि वह बिल को मंजूरी नहीं दें , जिस पर गवर्नर रिटायर्ड जस्टिस सीदुज़ जमन सिद्दीकी ने बिल को नामंजूर कर दिया। विभिन्न मुस्लिम संगठनों , कोंसिल आफ इस्लामिक आइडियोलोजी और इस्लामिक स्कालरों ने बिल के खिलाफ तर्क देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है, शायद कश्मीर में भी 1990 में इसी इस्लामिक तर्क के अनुसार अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा नहीं की गई।

सच यह है कि पाकिस्तान अपने ही संविधान और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के मुताबिक़ अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा करने में पूरी तरह फेल साबित हुआ है। तभी आज़ादी के समय जो 21 प्रतिशत हिन्दू और सिख पाकिस्तान में रह गए थे , अब वे सिर्फ डेढ़ प्रतिशत रह गए हैं , यह बात संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि ने 28 सितम्बर को ही संयुक्त राष्ट्र में उठाई थी। मानवाधिकार संस्थाओं का कहना कि पाकिस्तान में हर रोज 20 हिन्दू या ईसाई लडकियों का अपहरण हो रहा है। इस साल अप्रैल में आई मानवाधिकार आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि सिर्फ सिंध प्रांत में एक साल में हिन्दू और ईसाई लडकियों के अपहरण , उनके धर्म परिवर्तन और निकाह के पिछले एक साल में एक हजार केस दर्ज हुए।

इस रिपोर्ट के दो महीने बाद जुलाई में हिन्दू विधायक नन्द कुमार ने जबरी धर्म परिवर्तन के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया , जिसे विधानसभा ने पास कर दिया। अन्तराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिन्दुओं का सवाल उठने और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के बाद सिंध विधान सभा से प्रस्ताव पास होने से उत्साहित हिन्दू विधायक नन्द कुमार ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाए जाने के खिलाफ बिल पास करवाने की फिर कोशिश की। लेकिन 8 अक्टूबर को सिंध एसेम्बली ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन को रोकने लिए पेश किए गए अल्पसंख्यक सुरक्षा बिल को नामंजूर कर दिया। बिल में कहा गया था कि 18 साल से कम आयु के किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन नहीं हो , इस पर जमायत-ए-इस्लामी ने तर्क दिया कि लोगों के इस्लाम धर्म में परिवर्तन के लिए कोई आयु सीमा नहीं हो सकती। देश के संविधान में धार्मिक आज़ादी की गारंटी के बावजूद सिंध प्रांत की एसेम्बली ने अल्पसंख्यकों के सम्बन्ध में पाकिस्तान का दोहरा चेहरा उजागर कर दिया।

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