दुनिया पर कोरोना के शासन में... - Naya India
लेख स्तम्भ | विशिष्ट लेखक| नया इंडिया|

दुनिया पर कोरोना के शासन में…

डॉ. कुंदन लाल चौधरी

कहीं नहीं जा सकते

पहली बार ऐसा हुआ है
कहीं नहीं जा सकते
कोई जगह सुरक्षित नहीं है
सूरज के नीचे इस जमीन पर।

जहाज नहीं उड़ रहे
ट्रेनें नहीं चल रहीं
बसें नहीं जा रहीं
बाहर निकलना विकल्प नहीं है।

कोई शहर या बस्ती
कोई देश, या धरती
चुनने के लिए नहीं बची।
क्योंकि कोई महादेश निरापद नहीं
सभी एक बर्बर जकड़ में हैं,
उस मारक महामारी की।

सूरज के नीचे कोई जगह नहीं
जहाँ वे भाग कर जा सकें।

जहाँ भी आप देखें
एक श्मशानी वातावरण है
केवल खाली विस्तार
सड़कें और गलियाँ सूनी
राजमार्ग और अन्यमार्ग खाली
शहर भूतों में बदल गए हैं
लोग भाग गए हैं
मानवता भूमिगत हो गई है।

वे एक दूसरे से छिप रहे हैं
अपने-आप से छिप रहे हैं
वे आइनों में देखते हैं
सुरक्षित दूरी से
ताकि बहुत निकट न चले जाएं
अपनी ही छवि से।

क्योंकि उन्हें चेतावनी मिली है –
यह जो साँस है
यह जो स्पर्श है
और कौन जाने
यह जो नजर है
चाहे आपकी अपनी भी
कोई बुरी नजर नबन जाए।

उन्हें चेतावनी मिली है
एक दूसरे के निकट न आएं
दो हाथ की दूरी से कम।
आप चूम नहीं सकते
आप गले नहीं लग सकते
आप प्रेम नहीं कर सकते
ताकि कहीं वो कीड़ा न लग जाए।

छूत पूरी धरती में घूम रहा है
एक प्रेत
एक अदृश्य धूलकण
एक एंटी-गॉड कण
मानवता पर टूट पड़ा है
खतरनाक मुद्रा में छाया हुआ
किसी योगी के शाप की तरह।
एक शाप जो चुपचाप प्रवेश करता है
उन के फेफड़ों में
उन की साँस ले जाने के लिए।

अपने घरों में बंद
डर से अपने दिल को पकड़े
अवसाद गहरे जाते हुए
वे आँकड़ों को देखते हैं
और मृतकों को गिनते हैं।

लाशें मुर्दाघरों में भरी जा रही हैं
अपनी बारी के इंतजार में
ताकि जलाकर राख की जाएं।
दफनाने का विकल्प नहीं है,
कौन जाने
अंदर छिपा कोरोना
मृत सेबाहर निकल आना तय कर ले
और फिर हमला करे
और फिर-फिर।

दूरी रखना ध्येय बन गया है
वीडियो-वार्ता एक मात्र संपर्क
या दूर से सिर हिलाना
या एक नमस्ते,
जब तक कोरोना न चला जाए।
डॉ. चौधरी लेन,
रूप नगर, जम्मू – 180013
[email protected]

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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