बागी मूड में तालिबान

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तालिबान ने यह दो टूक कहा है कि अब वह किसी संयम को बरतने के लिए बाध्य नहीं है। उसका पक्ष यह है कि उसने एक मई तक हिंसा ना करने का वादा किया था। ये समयसीमा बीत चुकी है। इसके बाद वह जो उचित समझे, वह कार्रवाई करने के लिए आजाद है। तालिबान पहले ही एलान कर चुका है जब तक नाटो के सभी सैनिक अफगानिस्तान से वापस नहीं चले जाते, वह किसी शांति सम्मेलन में भाग नहीं लेगा। तालिबान ने जो कहा है कि उस पर अमल भी शुरू कर चुका है। पिछले महीने टर्की के शहर इस्तांबुल में हुए शांति सम्मेलन में उसने भाग नहीं लिया। उधर देश के अंदर उसने हमले शुरू कर दिए हैं। एक मई को उसने इनकी घोषित रूप से शुरुआत की। 24 घंटों के अंदर अलग-अलग प्रांतों में तालिबान ने लगभग डेढ़ सौ हमले किए। इनमें दर्जनों लोगों की मौत हुई।

ध्यानार्थ है कि तालिबान और पूर्व डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के बीच फरवरी 2020 में हुए समझौते में प्रावधान था कि एक मई 2021 तक सभी अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से वापस चले जाएंगे। तालिबान ने उसी समयसीमा का जिक्र किया है। उसने अब ये खुली धमकी दी है कि वह अमेरिकी और नाटो के सैनिकों को निशाना बनाएगा। इस तरह उसने जो बाइडेन प्रशासन को खुली चुनौती दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जनवरी में सत्ता में आते ही कहा था कि एक मई की समयसीमा का पालन करना संभव नहीं होगा। पिछले महीने उन्होंने एलान किया कि अब सभी अमेरिकी सैनिक अगले 11 सितंबर तक अपने देश लौटेंगे। तो अभी भी नाटो के लगभग दस हजार सैनिक अफगानिस्तान में मौजूद हैँ। उनमें करीब साढ़े तीन हजार अमेरिकी फौजी हैं। जाहिर है, तालिबान के नए रुख को देखते हुए अब अमेरिका सरकार को संभावित हमलों का मुकाबला करने की रणनीति बनानी होगी। वैसे अफगानिस्तान में सवा महीने से हिंसा तेज हो गई है। अप्रैल में हुई हिंसा में अफगानिस्तान के 438 सैनिक और नागरिक मारे गए। 500 से ज्यादा लोग उन हमलों में जख्मी हुए। इस दौरान बमबारी की लगभग दो सौ घटनाएं हुईं। अफगानिस्तान स्थित अमेरिकी सेना ने कहा है कि हर प्रकार के हमले का जवाब देने के लिए उसके पास सभी सैनिक साधन उपलब्ध हैँ। लेकिन तालिबान को ऐसे दावों से कोई फर्क नहीं पड़ता।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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