मामला कहीं गंभीर है

सेना के भीतर महत्त्वपूर्ण जानकारियां लीक करने की प्रवृत्ति और ऐसा करने वाले लोग मौजूद हैं, तो उस पर कहीं अधिक गंभीरता से सोच-विचार होना चाहिए। समस्या की जड़ों की तलाश ट्रेनिंग से लेकर प्रतिबद्धता पैदा करने में संबंधित संगठन की नाकामी तक में ढूंढना बेहतर होगा। सिर्फ सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने से मामूली फायदा ही होगा। बहरहाल, नौसेना ने ऐसा ही किया है। नौसैनिक अड्डों, डॉकयार्ड्स और जहाज पर पोस्टिंग के दौरान स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। दिसंबर में हनीट्रैप में फंसकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करते पकड़े गए 11 नौसैनिकों की गिरफ्तारी के बाद यह फैसला लिया गया है। आरोप है कि पकड़े गए लोगों में अधिकतर पाकिस्तानी एजेंट्स के जाल में फंसकर उन्हें सूचनाएं लीक कर रहे थे। आंध्र प्रदेश इंटेलीजेंस विभाग ने 19 दिसंबर को नौसेना में चल रहे एक जासूसी गिरोह का पर्दाफाश किया था। आंध्र प्रदेश इंटेलीजेंस ने इस ऑपरेशन को डॉल्फिंस नोज नाम दिया था।

विभाग के मुताबिक इन सातों नाविकों की भर्ती 2017 में हुई थी। गिरफ्तारी के समय इनकी पोस्टिंग अलग-अलग जगह पर थी। गौरतलब है कि हाल में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के वॉट्सऐप अकाउंट हैक होने की घटना के बाद भारतीय थलसेना ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए थे कि वे किसी भी तरह की संवेदनशील जानकारियां वॉट्सऐप पर शेयर ना करें। संसद के पिछले सत्र के दौरान राज्यसभा में सैनिकों के हनीट्रैप को लेकर एक सवाल पूछा गया था। तब रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नायक ने बताया था कि खुफिया एजेंसियां हनीट्रैप का प्रयास कर रही हैं। प्रशिक्षण संस्थानों में नए जवानों को इससे बचने की ट्रेनिंग दी जा रही है। भारतीय सेनाओं ने एडवायजरी जारी कर अपने कर्मचारियों से कहा था कि वे अजनबियों और खासकर विदेशी मूल के लोगों के साथ मित्रतापूर्वक व्यवहार करने से बचें। साथ ही अगर उन्हें ऐसी कोई आशंका लगे तो तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दें। ताजा घटना में तीन नाविकों को विशाखापट्टनम, दो को कारवार और दो नाविकों को नौसेना के मुंबई बेस से गिरफ्तार किया गया। उन पर आरोप है कि सितंबर 2018 से कुछ महिलाओं के संपर्क में थे। इन महिलाओं ने आरोपी नाविकों की पहचान एक व्यापारी से करवाई जो असल में पाकिस्तानी हैंडलर था। जाहिर है, मामला खतरनाक है। सोशल मीडिया इसका महज एक पहलू है। अतः इस मसले का हल कहीं व्यापक स्तर पर करने की जरूरत है।

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