बात बिल्कुल जरूरी है

जब भारत समेत कई देश कोरोना से जंग के लिए किसी खास ऐप के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक जरूरी हस्तक्षेप किया है। यह सबको ध्यान में रखना चाहिए कि ऐप से कोरोना के संदिग्ध मरीजों और मामलों की जानकारी इकट्ठा की जरूर जा सकती है, लेकिन यह इस बीमारी से लड़ने का अचूक औजार नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि जमीन पर काम करने के पुराने तरीके की जगह कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग ऐप और अन्य तकनीक नहीं ले सकती हैं। भारत सरकार लोगों से आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करने की अपील कर रही है। इस ऐप का मकसद इस बात की जानकारी देना है कि आप जाने अनजाने में किसी कोरोना वायरस संक्रमित शख्स के संपर्क में आए या नहीं। केंद्र सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य कर दिया है। कंटेनमेंट जोन बताए गए इलाकों में भी इस ऐप को डाउनलोड ना करना दंडनीय अपराध बना दिया गया है, जबकि कि इस मुद्दे पर देश में बहस छिड़ी हुई है। अनेक जानकार इसे निजता का हनन बता रहे हैं। एक हैकर ने ऐप की हैकिंग कर उनकी बातों की पुष्टि करने का दावा किया, हालांकि उसके बाद आरोग्य सेतु ऐप की तरफ से खंडन भी जारी किया गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेता इसे सबकी हर समय निगरानी का एक तरीका बता चुके हैं।

बहरहाल, डब्लूएचओ का हस्तक्षेप इस बहस से अलग है। इस वैश्विक संस्था ने इस बात पर जोर दिया है कि आईटी टूल्स सार्वजनिक स्वास्थ्य कर्मचारियों की जगह नहीं ले सकते, जिनकी जरूरत ट्रेस, जांच, आइसोलेट और क्वारंटीन करने में पड़ती है। कई देशों में जब लॉकडाउन से संबंधित पाबंदियों में ढील दी जा रही है, तब कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग ऐप की भूमिका बेशक महत्त्वपूर्ण हो सकती है। कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग ऐप की मदद से नए मामलों की पहचान हो सकती है और क्लस्टर बनने से रोका जा सकता है। मगर यह रामबाण नहीं है। डब्लूएचओ ने कहा है कि यह वायरस हमारे साथ लंबे समय तक रहने वाला है। ऐसे में हमें साथ आकर ऐसे उपाय विकसित और साझा करने होंगे, ताकि मानव मात्र की सुरक्षा हो सके। इन बातों पर अवश्य गौर किया जाना चाहिए। वरना, ऐप का भ्रम हमें जरूरी तैयारियों से हटा सकता है।

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