बड़े घोटालों में मददगार बैंक

भारत समेत दुनिया भर में बड़े बैंक बड़े घोटालों में शामिल हैं। यह बात बजफीड न्यूज और अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकारों के संघ (आईसीआईजे) की जांच से सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक नशीले पदार्थों को लेकर छिड़े युद्ध से होने वाला मुनाफा, विकासशील देशों में बड़े गबन और फर्जी निवेश स्कीमों के जरिए लोगों से ठगी गई उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई से हासिल पैसों को इन बैंकों ने खूब इधर से उधर किया। ऐसा इसके बावजूद किया गया कि खुद उन बैंकों के कर्मचारी ऐसा ना करने के लिए चेतावनियां देते रहे। इस जांच में भारत से इंडियन एक्सप्रेस समेत 88 देशों के 108 अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान शामिल हैं। अमेरिका के वित्त मंत्रालय की एजेंसी फिंकसीईएन को दुनिया भर की बैकों ने संदिग्ध गतिविधियों की जो हजारों रिपोर्टें सौंपी थीं। उनमें से लीक हुई कुछ रिपोर्टों को इस जांच में आधार बनाया गया। अमेरिकी मीडिया संस्थान बजफीड न्यूज ने रिपोर्ट की भूमिका में लिखा कि ये दस्तावेज बैंकों ने तैयार किए। उन्हें सरकारों के साथ उन्हें साझा किया गया, लेकिन इन्हें आम लोगों से दूर रखा गया। इनसे पता चलता है कि बैकिंग सिस्टम के सुरक्षा उपाय कितने खोखले हैं और अपराधी कितनी आसानी से उनका फायदा उठा सकते हैं। ये दस्तावेज 1999 से 2017 के बीच दो खबर डॉलर की लेन देन से जुड़े हैं।

फिंकसीईएन के लीक दस्तावेज सबसे पहले बजफीड न्यूज को मिले, जिन्हें बाद में आईसीआईजे के साथ साझा किया गया। इस जांच में जो पांच बैंक सबसे ज्यादा घेरे में हैं, उनमें जेपीमॉर्गन चेस, एचएसबीसी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, डॉयचे बैंक और बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन शामिल हैं। इन बैंकों पर आरोप है कि उन्होंने वित्तीय अपराधों में दोषी करार दिए लोगों के पैसों के लेन देने की खुली छूट दी। इंडियन एक्सप्रेस ने इन दस्तावेजों पर आधारित अपनी रिपोर्ट में भारत से जुड़े पहलुओं को उभारा है। अखबार के मुताबिक फिनसीईएन के दस्तावेज बताते हैं कि भगोड़े अपराधी दाउद इब्राहिम का फाइनेंसर बताया जाने वाला पाकिस्तानी नागरिक अल्ताफ कनानी कैसे मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क चलाता है। कनानी के मनी लॉन्ड्रिंग संगठन (एमएलो) और अल जरूनी एक्सचेंज के बीच बरसों तक लेन देन होता रहा है। अनुमान है कि नशीली दवाओं का कारोबार करने वालों और अल कायदा, हिज्बुल्लाह और तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों को हर साल 14 से 16 अरब डॉलर की रकम ट्रांसफर की गई है। दाऊद इब्राहिम और कनानी के बीच संबंध अमेरिकी विदेशी पूंजी नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) के दस्तावेजों में दर्ज हैं।

One thought on “बड़े घोटालों में मददगार बैंक

  1. क्या बैंक स्वतंत्र हैं ?

    क्या क्या उनपर किसी की निगरानी या सत्ता नहीं हैं ?

    क्या इसमें सत्ताधारियों का हाथ नहीं हैं ?

    क्या सत्ता धारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा हो सकता है?

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