भीमा मामले के पेच


क्या भीमा कोरेगांव में मामले में जिन सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया है, उनके खिलाफ सबूत गढ़े गए? ये सवाल एक अमेरिकी कंपनी के दावे से उठा है। आर्सनल नाम की इस कंपनी ने पिछले हफ्ते दावा किया कि गिरफ्तार कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर को हैक कर उसमें एक चिट्ठी प्लांट की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने की बात थी। इसी आरोप में विल्सन और 15 दूसरे कार्यकर्ता पिछले दो सालों से भी ज्यादा से जेल में कैद हैं। इस ताजा दावे से इस मामले पर तुरंत कोई फर्क पड़ेगा, ऐसा नहीं लगता। इसके बावजूद इससे बहुत से लोगों के मन में इस केस को लेकर पहले से जारी शक और गहरा हो जाएगा। अब यह न्यायपालिका पर है कि वह इस मामले की मौजूद सभी वैज्ञानिक विधियों से माकूल जांच कराए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

अगर सच वही है, जो दावा किया गया है, तो फिर यह भी सामने आना चाहिए कि आखिर कंप्यूटर हैक किसने किया और उसे ऐसा करने के लिए किसने प्रेरित किया? वैसे नई जानकारी के सामने आने के बाद रोना विल्सन के वकीलों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्जी दे कर पूरे मामले की नए सिरे से जांच की मांग की है, जो उचित ही है। अमेरिकी डिजिटल फॉरेंसिक कंपनी आर्सेनल कंसल्टिंग ने विल्सन के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क की एक कॉपी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण करने के बाद कंपनी ने दावा किया है कि रोना की गिरफ्तारी के करीब 22 महीनों पहले उनके कंप्यूटर में एक मैलवेयर भेज कर उसे हैक कर लिया गया था। फिर धीरे धीरे उनके कंप्यूटर में कम से कम 10 दस्तावेज “प्लांट” किए गए। यानी उनकी जानकारी के बिना उनके कंप्यूटर में ये दस्तावेज छिपा दिए गए। कंपनी की रिपोर्ट में मैलवेयर भेजने वाले के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। बहरहाल, ये बात अगर सच साबित हुई, तो उससे देश में भय का माहौल और गहरा होगा। इससे लोगों में ये धारणा बनेगी कि किसी को भी इस तरह फंसाया जा सकता है। इसलिए इस मामले की तह तक पहुंचना जरूरी है। अगर ये रिपोर्ट गलत है, तो फिर अमेरिकी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। आखिर उसने एक बहुचर्चित मामले को गहरे रूप से प्रभावित करने की कोशिश की है।


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