ब्रिटेन और चीन आमने-सामने

चीन के तेवर इन दिनों देखने लायक हैं। उसका संदेश साफ है कि वह किसी के आगे नहीं झुकेगा। ताजा मोर्चा ब्रिटेन के खिलाफ खुला है। हांगकांग में लागू किए गए नए सुरक्षा कानून के विरोध में ब्रिटेन ने कहा कि वह हांगकांग के उन लोगों को नागरिकता देगा, जो ब्रिटेन आकर बसना चाहेंगे। इस पर चीन ने ब्रिटेन को धमकी दी। कहा है कि वह भी इस तरह के कदम उठा सकता है। लंदन में चीनी दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा कि हांगकांग में रहने वाले सभी देशवासी चीनी नागरिक हैं। अगर ब्रिटिश पक्ष संबंधित नियमों में एकतरफा तौर पर बदलाव करेगा, तो उससे ना सिर्फ उसकी अपनी स्थिति और संकल्प कमजोर होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को परिभाषित करने वाले बुनियादी नियमों का भी उल्लंघन होगा।

चीनी बयान में कहा गया कि इसी तरह का जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। बात यहीं तक नहीं रही। एक प्रेस कांफ्रेंस में चीन सरकार के प्रवक्ता ने ब्रिटेन के कदम की निंदा की। प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर “गंभीर परिणामों” की चेतावनी दी। चीन प्रशासित हांगकांग में नया सुरक्षा कानून लागू होने के बाद पुलिस ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया था। कुछ लोगों को तो झंडे फहराने और “अलगाववादी प्रतीक दिखाने” के लिए गिरफ्तार किया गया। हांगकांग में पिछले साल व्यापक आजादी समर्थक और लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन हुए थे। इसी सिलसिले में ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने कहा कि ब्रिटेन हांगकांग के उन तीस लाख लोगों को नागरिकता की पेशकश करता है, जिनके पास ब्रिटिश नेशनल ओवरसीज पासपोर्ट हैं या फिर वे इसे पाने के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि आजादी की ज्वाला बहुत कीमती है। हांगकांग को छोड़ते वक्त हमने उनसे वादा किया था और उस वादे को पूरा करने के लिए जो कुछ भी संभव होगा, जो कुछ हमारी क्षमता में होगा, हम वह करेंगे। हांगकांग में 1997 तक ब्रिटिश शासन था। 23 साल पहले ब्रिटेन ने इस वादे के साथ उसे चीन को सौंपा था कि अगले पचास साल तक इस शहर की न्यायिक और विधायी स्वायत्तता बनी रहेगी। आलोचकों का कहना है कि चीन इस वादे को अब तोड़ रहा है। चीनी दूतावास का बयान सामने आने के बाद चीनी राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया। जबकि चीन का कहना है कि उसके अंदरूनी मामलों में ब्रिटेन को दखल नहीं देना चाहिए। तो कुल मिलाकर दोनों देशों ठन गई है।

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