कोरोना संक्रमण पर चमत्कार!


भारत में कोरोना वायरस से रोजाना संक्रमण की संख्या में आई नाटकीय गिरावट ने विशेषज्ञों को भी चकित किया है। इसका कारण समझना आम जन के साथ उनके लिए भी मुश्किल बना हुआ है कि आखिर रोजाना संक्रमण की दर लगभग एक लाख पहुंचने के तुरंत बाद इतनी तेज गति से इसमें गिरावट कैसे आ गई? अब यहां हर रोज बमुश्किल 11,000 लोग संक्रमित हो रहे हैं। तो क्या भारत के लोगों में इस वायरस से संरक्षण देने वाली कोई चीज पहले से ही मौजूद थी? यह भारत में तेजी से हर्ड इम्युनिटी विकसित हो गई? शहरों में जरूर लोगों के मास्क पहनना शुरू किया, जिसका कुछ असर रहा होगा। इसके बावजूद विशेषज्ञों की राय में इस गिरावट को समझना कहीं ज्यादा जटिल है। इसलिए कि संक्रमण में गिरावट हर इलाके में है और इनमें से कई इलाके ऐसे हैं जहां मास्क पहनने के नियम का पालन प्रभावी तरीके से नहीं हुआ।

बहरहाल, कुछ जानकारों की इस राय पर जरूर गौर करना चाहिए कि अगर हम कारण नहीं जानते, तो मुमकिन है कि हम अनजाने में ऐसी चीजें कर रहे हों, जो मामले को आगे चल कर और उलझा सकती है। एक सच यह भी है कि भारत में भी बहुत से संक्रमित लोगों का पता नहीं चल सका। साथ ही एक सवाल भारत में संक्रमित लोगों की संख्या गिनने के तरीके पर भी है। बिहार के मामले में हुआ खुलासा इसकी सिर्फ एक मिसाल है। इस ट्रेंड का श्रेय टीकाकरण को तो नहीं दिया जा सकता, क्योंकि भारत में टीके जनवरी में ही लगने शुरू हुए हैं। वैसे कई विशेषज्ञों की इस चिंता में दम है कि वायरस के नए संस्करण आगे चल कर नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। भारत में गांव के बजाय शहरों में ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं। मुमकिन है कि ऐसा इसलिए हुआ हो कि ग्रामीण इलाकों में आबादी का घनत्व कम है। लोग वहां खुली जगहों में काम करते हैं और उनके घर भी हवादार होते हैं। इसके अलावा एक संभावना यह भी है कि भारत के लोग हैजा, टायफॉयड और टीबी जैसी कई बीमारियों का सामना करते रहे हैं। इन बीमारियों के संपर्क में रहने की वजह से उनके शरीर में उनसे लड़ने की ताकत भी आई है और उसके लिए इम्युनिटी भी विकसित हुई है। बहरहाल, जो भी हो, बेहतर यही होगा कि अभी सावधानी जारी रखी जाए। वरना, जो सुधार अभी दिख रहा है, वह आगे चल कर कहीं बड़ी समस्याएं खड़ी कर सकता है।


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