कोरोना फिलहाल बेलगाम है

भारत में कोरोना संक्रमण से पीड़ित लोगों की संख्या पांच लाख पार कर चुकी है। लेकिन गौर करने की बात सिर्फ यह नहीं है। बल्कि हमें ध्यान इस पर देना चाहिए कि भारत में पहला केस आने के बाद प्रथम एक लाख तक संख्या पहुंचने में 78 दिन लगे थे। तीन से चार तक मामले सिर्फ आठ दिन में पहुंच गए। और चार से पांच लाख कर ये संख्या पहुंचने में सिर्फ छह दिन लगे। जाहिर है, ऐसा संक्रमण के तेज फैलाव के कारण हो रहा है। यह तो रोज साफ है कि प्रति दिन संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जबकि ये सिर्फ वो मामले हैं, जो दर्ज हुए हैं। इनमें वो लोग शामिल नहीं हैं जिनकी जांच नहीं हुई, मगर संभव है कि वो संक्रमित हों। इनमें वो लोग भी नहीं हैं जिन्हें एसिमटोमैटिक कहा जाता है- यानी ऐसे लोग जिनके संक्रमित होने के बावजूद जिनमें इस रोग के लक्षण नहीं उभरते। ये स्वाभाविक ही है कि भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते हुए मामलों को देखकर चिंताएं गहरा रही हैं।

सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नए मामले इसलिए आ रहे हैं क्योंकि जांच की संख्या भी बढ़ा दी गई है। आईसीएमआर के अनुसार अब रोज 24 घंटों में दो लाख से भी ज्यादा सैंपलों की जांच हो रही है। अभी तक देश में कुल लगभग 80 लाख सैंपलों की जांच हो चुकी है। संक्रमण से मरने वालों की संख्या 15 हजार को पार कर गई है। प्रति दिन औसतन 400 से भी ज्यादा मौतें हो रही हैं। महाराष्ट्र अभी भी सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य बना हुआ है। दूसरे नंबर पर दिल्ली है। लेकिन शहरों की सूची में दिल्ली मुंबई को भी पीछे छोड़ कर पहले नंबर पर आ गई है। सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिलने के बाद केंद्र सरकार दिल्ली में संक्रमण के प्रबंधन में सक्रिय हुई। रणनीति में कई परिवर्तन लाने का एलान हुआ। दिल्ली में रोज जांच किए जाने वाले सैंपलों की संख्या बढ़ा दी गई है। यह लगभग साढ़े चार लाख टेस्ट हो चुके हैं। दिल्ली में जांच की संख्या और बढ़ाने के लिए सरकार ने अब घर घर जाकर एक एक परिवार की जांच करने का निर्णय लिया है। ये सही तरीका है। लेकिन अभी तक असर कोई खास नहीं हुआ है। इसलिए चौकसी और प्रयास लगातार बढ़ाने की जरूरत है।

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