डब्लूएचओ क्यों बना अखाड़ा?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 73वीं बैठक से यह साफ संकेत मिला कि फिलहाल ये संगठन दुनिया के ताकतवर देशों के सत्ताधारी नेताओं की अपनी अंदरूनी राजनीति को साधने और वैश्विक जोर-आजमाईश का अखाड़ा बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अब डब्लूएचओ की फंडिंग पूरी तरह बंद करने की धमकी दी है। उधर चीन ने कहा है कि ट्रंप अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़ रहे हैं।

मगर ट्रंप लगातार चीन को निशाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि अगर चीन ने शुरू में ही प्रभावी कदम उठाए होते, तो आज यह महामारी इस कदर दुनिया भर में कोहराम नहीं मचा रही होती। ट्रंप ने डब्लूएचओ को ‘चीन की कठपुतली’ बताते हुए उसकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही इस संस्था को अमेरिका से मिलने वाली फंडिंग की बड़ी रकम को हमेशा के लिए बंद करने की धमकी दी है।

डब्लूएचओ की बैठक में निर्णय हुआ कि ये संगठन कोरोना महामारी से निटपने के अपने तौर तरीकों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करेगा। चीन ने पूरी तरह डब्लूएचओ का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका बेवजह चीन की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहा है और अपनी नाकामी को छिपाने के लिए चीन की आड़ ले रहा है।

यूरोपीय संघ ने भी डब्लूएचओ का समर्थन किया। उसके प्रवक्ता ने कहा कि यह समय एकजुटता का है। यह समय एक दूसरे पर उंगली उठाने और बहुपक्षीय सहयोग को कमजोर करने का नहीं है। असल में बहुत से देशों ने डब्लूएचओ के प्रयासों की सराहना की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंटोनियो गुटेरेश ने डब्लूएचओ की एसेंबली के दौरान कहा कि कोरोना महामारी जैसी घातक वैश्विक चुनौतियों लिए एक नई एकता और एकजुटता की जरूरत है।

उन्होंने विकासशील देशों को इस महामारी से बचाने पर खास तौर से जोर दिया। कहा कि कोविड-19 से मिले सबक भविष्य में संकट से निपटने में मददगार साबित होंगे। मगर डब्लूएचओ को लिखे अपने खत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अकेला रास्ता यही है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन साबित करे कि वह चीन से स्वतंत्र है। ट्रंप का आरोप है कि डब्लूएचओ पूरी तरह चीन के इशारे पर काम करता है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह वही ट्रंप हैं जो पहले चीन की तारीफ कर रहे थे। अब वे अपनी नाकामियों पर परदा डालने के लिए चीन को निशाना बना रहे हैं।

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