मगर चिंता आखिर किसे है?

संयुक्त राष्ट्र की सूचनाएं आधिकारिक होती हैं। संयुक्त राष्ट्र ये सूचनाएं इसलिए जारी करता है, ताकि दुनिया भर की सरकारें मौजूद चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कमर कस सकें। लेकिन आज के दौर में, जब दुनिया का सारा विमर्श भटका हुआ है, ऐसी बहुत सी गंभीर सूचनाएं भी खबर नहीं बन पातीं। यह अफसोसनाक है। इन्हीं सूचनाओं में एक यह है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में भुखमरी पैर पसार रही है। भोजन नहीं मिल पाने से 10,000 से अधिक बच्चों की मौत हर महीने हो रही है। इससे गरीब देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यूएन की एक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाली जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गांव में उपजे उत्पाद बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। गांव खाद्य और मेडिकल सप्लाई से कट चुके हैं। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि कोरोना वायरस की वजह से हुई भोजन की आपूर्ति में कमी के कारण एक साल में 1,20,000 बच्चों की मौत हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक हर महीने 5,50,000 से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र की चार एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते कुपोषण के दीर्घकालिक नतीजे हो सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के के मुताबिक, कोविड संकट का खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव अब से कई वर्षों तक दिखता रहेगा। इसका गहरा सामाजिक प्रभाव होने जा रहा है। दुनिया भर में कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियों के कारण पहले से ही भुखमरी की मार झेल रहे समुदाय अब और हाशिए पर चले गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिशा में राष्ट्रों से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उसने कहा है कि विश्व के नेताओं को इससे निपटने के लिए कदम उठाने होंगे। दरअसल, कोरोना वायरस महामारी ना सिर्फ अमीर देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि गरीब देशों पर अधिक असर डाल रही है, जहां लाखों की संख्या में लोग भुखमरी का सामना करने को मजबूर हो जाएंगे। इसी महीने यूएन की एक अन्य रिपोर्ट में वैश्विक भुखमरी को लेकर कहा गया था कि पिछले साल भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या एक करोड़ बढ़ गई थी। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि कोरोना वायरस महामारी इस साल करीब 13 करोड़ अतिरिक्त लोगों को भुखमरी की ओर धकेल सकती है।

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