संकट की मुद्रा - Naya India
बेबाक विचार | लेख स्तम्भ | संपादकीय| नया इंडिया|

संकट की मुद्रा

सुप्रीम कोर्ट ने आभासी मुद्रा यानी क्रिप्टोकरेंसी पर से प्रतिबंध हटा कर इसके चलन का रास्ता तो साफ कर दिया है, लेकिन साथ ही भारत की बैंकिंग व्यवस्था के समक्ष एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी है। हालांकि अभी इस बारे में सारे फैसले सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को मिल कर करने हैं, लेकिन इतना तो साफ हो गया है कि आने वाले वक्त में आभासी मुद्रा का कारोबार देश भर में जोर पकड़ेगा। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आभासी मुद्रा का चलन कितना मुफीद बैठेगा, इसे लेकर आशंकाएं ही ज्यादा है। वरना रिजर्व बैंक और सरकार पहले ही इसकी अनुमति दे चुके होते। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आभासी मुद्रा के चलन पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए साफ कहा कि केंद्रीय बैंक ऐसी कोई संतोषजनक दलील पेश नहीं कर पाया है जिससे यह साबित हो सके कि आभासी मुद्रा का कारोबार या लेनदेन कहीं से भी नुकसान पहुंचाने वाला है।

देश में आभासी मुद्रा का कारोबार पिछले एक दशक में ही शुरू हुआ है। लेकिन इसके खतरों को भांपते हुए बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक ने छह अप्रैल, 2018 को एक आदेश जारी कर बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इसके लेनेदेने से बचने को कहा था। दो हफ्ते बाद ही रिजर्व बैंक के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। उसके बाद पिछले साल जुलाई में एक अंतर-मंत्रालयी पैनल ने आभासी मुद्रा पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक का मसविदा पेश किया। इससे यह संकेत तभी मिल गया था कि सरकार आभासी मुद्रा के चलन की मंजूरी देने के पक्ष में नहीं है। सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम देश आभासी मुद्रा के कारोबार के पक्ष में नहीं हैं और इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इंटरनेट के जरिए संचालित होने वाली इस तथाकथित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है, कोई इस पर लगाम नहीं है। किसी भी देश में अर्थव्यवस्था के सफल और पारदर्शी तरीके से संचालन के लिए नियामक संस्था का होना बहुत जरूरी है, जो उससे संबंधित नियम-कायदे बनाए और जालसाजी जैसी घटनाओं से लोगों के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करे। अभासी मुद्रा का कारोबार कर रही कई कंपनियों के अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में तो एटीएम भी हैं। लेकिन भारत में आभासी मुद्रा का चलन अभी दूर की कौड़ी है। जहां न नेटबैंकिंग सुरक्षित हैं, न एटीएम और बैंक धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *