दिल्ली में टूटती मर्यादाएं

निर्वाचन आयोग ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से हटाने का निर्देश दिया है। दोनों ने दिल्ली विधान सभा के चुनाव के लिए जारी प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण दिए थे। इसके पहले भाजपा उम्मीदवार कपिल मिश्रा भी ऐसी बात कह चुके थे। उनके खिलाफ भी आयोग ने कार्रवाई की। लेकिन ये तमाम कार्रवाइयां दिखावटी महसूस होती हैं, क्योंकि भाजपा नेताओं को इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता। पार्टी के नेता खुलकर सांप्रदायिक प्रचार कर रहे हैं। उनके इस शोर के बीच शासन एवं प्रशासन संबंधी प्रमुख मुद्दे गायब हो गए हैं। आम आदमी पार्टी की इसके लिए तारीफ जरूर करनी होगी कि वहग अपने काम पर वोट मांग रही है। जबकि भाजपा का मुख्य निशाना शाहीनबाग और नागरिकता संशोधन कानून विरोधी आंदोलन है। उसका कहना है कि दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के बहाने नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध हो रहा है। पार्टी ने कहा है कि दिल्ली का चुनाव में जीतते ही वह शाहीन बाग का रास्ता खुलवा देगी। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में आम आदमी पार्टी (आप) ने अकेले 54 फीसदी वोट के साथ 70 में से 67 सीटें जीती थीं। इसी इतिहास को दोहराने की चुनौती दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर है। दूसरे नंबर की पार्टी भाजपा को 2015 में करीब 32 फीसदी वोट मिले, लेकिन सीटें सिर्फ तीन मिलीं। जबकि कांग्रेस को 2015 में सिर्फ 9.65 फीसदी वोट मिले थे और 62 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। केजरीवाल के खिलाफ भाजपा ने मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं उतारा है, बल्कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे रख कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने की ख्वाहिश रख रही है। भाजपा ने 2013 और 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी कोई सीएम चेहरा नहीं उतारा था, जिसका उसने खामियाजा भी उठाया था। चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में करने के लिए इस बार सत्ताधारी दल मुफ्त बिजली-पानी, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और बुजुर्गों के लिए तीर्थयात्रा योजना लागू करने का वादा कर रहा है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों सीटें जीती थीं। लेकिन महाराष्ट्र और झारखंड में सत्ता गंवा बैठने के बाद उसके सामने अधिक बड़ी चुनौती है। शायद यही वजह है कि भाजपा ने अब दिल्ली के चुनाव में बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। लेकिन इस क्रम में तमाम शिष्टताएं और सामाजिक मर्यादाएं टूट रही हैं।

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