बात तो आगे बढ़ी है

अमेरिका में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लायड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद जो ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान दुनिया भर में फैला, उसका व्यापक असर हुआ है। इस बात के प्रमाण जीवन के कई क्षेत्रों में सामने आए हैं। मसलन, एक घटनाक्रम यह है कि अब त्वचा को गोरा करने के दावे साथ जो क्रीम बेची जाती थी, उसे बनाने वाली कंपनियां अपने ब्रांड्स के नाम बदल रही है। यूनिलिवर का प्रोडक्ट फेयर एंड लवली दुनिया भर में काफी सफल और लोकप्रिय रहा है। भारत में करीब 150 रुपये में मिलने वाली क्रीम फेयर एंड लवली की लाखों ट्यूब एक साल में बिकती रही है। पिछले 45 साल से भारतीय बाजार में सौंदर्य उत्पाद बेचने वाली यूनिलिवर सालाना 50 करोड़ डॉलर केवल भारतीय बाजार से कमाती रही है। मगर अब ये कंपनी नई ब्रांडिंग के साथ अपने प्रोडक्ट को बाजार में उतार रही है। हालांकि अनेक आलोचकों का मानना है कि यह सिर्फ कलेवर बदलना है। इसकी संभावना कम ही है कि सौंदर्य की दुनिया का सबसा बड़ा ब्रांड अश्वेत रंग के खिलाफ पूर्वाग्रहों की सोच गहरी करने के रास्ते से पूरी तरह हट जाएगा। फिर भी नाम बदलना महत्त्वपूर्ण है।

यूनिलिवर का कहना है कि वह ‘फेयर’, ‘व्हाइट’ और ‘लाइट’ जैसे शब्द मार्केटिंग और पैकेजिंग से हटा रही है। ‘फेयर एंड लवली’ ब्रांड अब ‘ग्लो एंड लवली’ किया जा रहा है। फ्रेंच कॉस्मेटिक कंपनी लॉरियल भी इसी तरह से अपने उत्पादों से शब्द हटा लेगी। जॉनसन एंड जॉनसन ने कहा है कि वह न्यूट्रोजेना की फेयरनेस और गोरा करने वाली क्रीम नहीं बेचेगी। अमेरिका में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद जिस तरह से रंगभेद के खिलाफ प्रदर्शन दुनिया भर में हुए हैं, यह परिवर्तन उसका ही नतीजा है। इन प्रदर्शनों ने सदियों से जारी नस्लभेदी और रंग भेदी सोच के खिलाफ व्यापक चेतना पैदा की है। इसलिए अब इन कंपनियों को अपना पुराना नजरिया लाभदायक नहीं लग रहा है। गौरतलब है कि दुनिया भर के अधिकार कार्यकर्ता यूनिलिवर के फेयर एंड लवली के लिए आक्रामक विज्ञापन के खिलाफ आवाज उठाते आए हैं। मगर तब इस कंपनी ने ध्यान नहीं दिया। इसीलिए अब आए बदलाव को अनेक लोग संदेह की नजर से देख रहे हैं। इसके बावजूद, जो भी बदलाव सकारात्मक दिशा में हो, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

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