सच-झूठ की किस परवाह?

सच्ची उपलब्धियों पर गर्व करना एक उचित भावना है। लेकिन अगर उपलब्धि ना हो, तो उसे गढ़ लेना अपने को धोखे में रखना होता है। दुर्भाग्य से आज भारत में यही हो रहा है। इसका दूरगामी नुकसान यह होग कि लोग अपनी कमजोरियों की जानकारी से दूर हो जाएंगे और एक भ्रम में खोये रहेंगे। अब यह साफ हो गया है कि समाचार एजेंसी एएनआई गलत खबर प्रसारित की। उसके आधार पर भारत के कई मीडिया चैनलों ने उसे दिखा दिया। खबर में झूठा दावा किया गया था कि पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक जफर हिलाली ने 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक में 300 मौतों की बात स्वीकार की है। अब ये बात सच है या झूठ, इसके चक्कर में कितने लोग पड़ेंगे? भारतीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा एक राजनीतिक परियोजना का हिस्सा बन चुका है। उसका मकसद वर्तमान सरकार और उसके मुखिया की छवि को चमकाए रखना है। अब अगर इसमें झूठ का ही सहारा लिया गया हो तो वह इसकी चिंता नहीं करता। वरना, जिन माध्यमों ने जोरशोर से ये खबर दिखाई, आखिर उनमें से कितनों ने उसका उसी अंदाज में खंडन किया? तो असल बात है कि बात जहां पहुंचानी थी, पहुंच गई। अब बाकी काम सच- झूठ का पता लगाने वालों का है। वे लगाते रहें, लेकिन आखिर उनकी पहुंच कितनी है?

बहरहाल, खबरों के सच-झूठ को परखने वाली वेबसाइट बूम के अनुसार पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तानी चैनल ‘हम न्यूज़’ से बात करते हुए हिलाल ने जो कहा उसी के वीडियो क्लिप के आधार पर ये दावा किया जा रहा था। एएनआईए ने अपने एक आर्टिकल में लिखा- ‘पूर्व पाक राजनयिक जफर हिलाली ने स्वीकार किया है कि 26 फरवरी 2019 को भारत द्वारा बालाकोट में एयरस्ट्राइक किए जाने से 300 मौतें हुई थीं।’ लेकिन वो क्लिप वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर तैयार की गई थी। हम न्यूज चैनल पर उपलब्ध पूरे वीडियो को देखने से पता चला कि हिलाली भारत के 300 लोगों को मारने के मकसद की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि भारत ऐसा करने में असफल रहा। उन्होंने कहा कि भारत ने एक फुटबॉल मैदान पर बम विस्फोट कर झूठा दावा किया कि उन्होंने स्ट्राइक में 300 पाकिस्तानियों को मार गिराया है। सच्ची उपलब्धियों पर गर्व करना एक उचित भावना है। लेकिन अगर उपलब्धि ना हो, तो उसे गढ़ लेना अपने को धोखे में रखना होता है। दुर्भाग्य से आज भारत में यही हो रहा है। इसका दूरगामी नुकसान यह होग कि लोग सच्चाई और अपनी कमजोरियों की जानकारी से दूर हो जाएंगे और एक भ्रम में खोये रहेंगे। ऐसे हालात का क्या नतीजा होता है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

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